महिला अपराध और सरकारी संरक्षण

देश में विमर्श का स्तर जितना नीचे गिरता जा रहा है उसे देखते हुए आने वाले समय में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अत्याचारों में भी अगर धर्म जाति को देखकर सरकारें काम करना शुरू कर देंगीं तो संविधान की मूल भावना का साथ किस तरह से न्याय किया जा सकेगा ? ताज़ा प्रकरणों में जिस तरह से कठुआ और उन्नाव में लड़कियों के खिलाफ होने वाले अपराधों में भी पार्टी और धर्म के साथ जातियों को भी प्राथमिकता दी जा रही है उससे निश्चित तौर पर सरकार और सत्ताधारी…

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नीरव मोदी – नीयत से नियति तक

पीएनबी की तरफ से किये गए एक खुलासे के बाद जिस तरह से २०१४ में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रचंड लहर पर सवार होकर सत्ता में आने वाली मोदी सरकार के लिए नीरव मोदी प्रकरण ने कई बड़े प्रश्नचिन्ह लगाने का काम कर दिया है यह सही है कि मोदी के पूर्ववर्ती पीएम मनमोहन पर भी कभी व्यक्तिगत स्तर पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगा था पर भाजपा जनता में यह सन्देश भेज पाने में पूरी तरह से सफल हो गयी थी कि पूरी यूपीए सरकार आकंठ भ्रष्टाचार में डूबी…

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कासगंज – समस्या से सबक तक ?

गणतंत्र दिवस पर निकाली जा रही तिरंगा यात्रा को लेकर कासगंज में जिस तरह से सुनियोजित उपद्रव किया गया उससे यही लगता है कि आज भी यूपी के विभिन्न जिलों में महत्वपूर्ण पदों पर ऐसे अधिकारी बैठे हुए हैं जिन्हें समुचित प्रशासनिक अनुभव नहीं है या फिर वे किसी दबाव में काम नहीं कर पा रहे हैं. दुनिया की सबसे बड़ी पुलिस फोर्स यूपी पुलिस के नए मुखिया ने आते ही जिस तरह से पूरे बल को एक कड़े सिस्टम के अंतर्गत चलाने की बात कही और यूपी के सीएम…

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