व्हाट्सऐप – समाज के लिए खतरा

देश में तेज़ी से बढ़ती इंटरनेट की रफ़्तार और उसके साथ आने वाली सुविधाओं के साथ जिस तरह से एक नई तरह की समस्या सामने आ रही है उसके बारे में देश का कानून, सरकार, सोशल मीडिया कंपनियां और समाज तैयार किसी भी स्तर पर तैयार नहीं दिखता है जिसके चलते विशेष उद्देश्यों से फैलाये गए सुनियोजित उन्माद या अफवाह से आज देश के विभिन्न हिस्सों से भीड़ द्वारा निर्दोषों की हत्या किये जाने की घटनाओं में निरंतर वृद्धि होती जा रही है. आंकड़ों के अनुसार जिस तरह से अब…

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कश्मीर – पत्थरबाज़ी और अर्थव्यवस्था

कश्मीर घाटी में आतंकी अलगाववादियों के समूहों की तरफ से जिस तरह माहौल को लगातार बिगाड़ने का काम किया जा रहा है उसे देखते हुए वहां पर शांति अभी दूर की कौड़ी ही लगती है पर जिस तरह से राज्य सरकार में शामिल भाजपा के लिए परिस्थितियां मुश्किल होती जा रही है उससे राज्य के साथ देश की राजनीति पर भी पड़ने वाले असर को नकारा नहीं जा सकता है. अपनी चिरकालीन कश्मीर नीति से पीछे हटते हुए जिस तरह से मोदी और भाजपा ने राज्य सरकार में साझेदारी की…

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वैचारिक अभिव्यक्ति और विभेद

अभी तक के स्थापित मानकों के अनुसार जिस तरह से यह समझा और कहा जाता कि शिक्षा बढ़ने के साथ मनुष्य का सामाजिक, आर्थिक और व्यक्तिगत विकास अच्छी तरह से हो सकता है पर पिछले कुछ दशकों में जिस तरह से अशिक्षितों के साथ शिक्षितों की मानसिक स्थिति भी एक जैसी ही होती जा रही है वह सम्पूर्ण मानव जाति के लिए आने वाले समय में एक खतरा बन सकती है. विश्व के कई देशों में इस्लाम के नाम पर चल रहे चरमपंथ को जिस तरह से उच्च शिक्षित लोगों…

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