केंद्र और संवैधानिक पद

कर्नाटक में त्रिशंकु विधानसभा के सामने आने के बाद जिस तरह से राजनैतिक घटनाक्रम में तेज़ी से बदलाव दिखाई दिया उससे किसी को भी आश्चर्य नहीं होना चाहिए क्योंकि हमारे नेताओं की नैतिकता केवल तभी तक रहती है जब तक उनको अनैतिक कार्य करने का मौका नहीं मिलता है और इस काम में केंद्र में सत्ताधारी दल की तरफ से सदैव ही दबाव देकर काम किया जाता रहता है. आज़ादी के बाद से जिस तरह से धीरे धीरे केंद्र सरकार ने अपने अधिकारों का नैतिकता के मापदंडों को किनारे करते…

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एक साथ चुनाव

देश में इस समय लोकसभा और विधानसभा चुनावों के एक साथ कराये जाने की संभावनाओं पर गंभीर विचार शुरू भी नहीं हुआ है पर जिस तरह से इस पर बातें की जा रही हैं वे कहीं न कहीं से इस बात को रेखांकित अवश्य करती हैं कि सरकर चुनाव आयोग इस दिशा में सोच अवश्य रहे हैं. यह बात कहने में जितनी आसान लगती है क्या उसे धरातल पर उतार पाना भी संभव है अब इस बात पर विचार की आवश्यकता भी है. लोकतंत्र में राजनैतिक अस्थिरता के आने के…

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उग्र बच्चे उत्तरदायी कौन ?

लखनऊ के एक स्कूल में सातवीं में पढ़ने वाली एक छात्रा ने जिस तरह से पहली कक्षा के मासूम बच्चे पर जानलेवा हमला कर उसे जान से मारने की कोशिश की वह हमारे समाज की वर्तमान व्यवस्था को झकझोरने के लिए काफी है क्योंकि भले ही पहली दृष्टि में हम सभी को यह एक असामान्य घटना लगे जिसमें सिर्फ एक दिन की छुट्टी हो जाने की आशा में कोई ११ साल की लड़की इस हद तक चली गयी हो पर गंभीरता से विचार करने पर यह पूरी तरह से सामाजिक,…

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