स्वायत्त रिज़र्व बैंक

                                                         अपने तीन साल के कार्यकाल को पूरा करने के अंतिम चरण में रिज़र्व बैंक के गवर्नर रघुरामन राजन ने जिस तरह से केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता के बारे में स्पष्ट रूप से एक बार फिर राय दी है वह निश्चित तौर पर सरकार को कुछ हद तक विचलित कर सकती है क्योंकि देश के अंदर की राजनैतिक परिस्थितियों के चलते कोई नेता मंत्री या स्वयं सरकार की तरफ से कैसा भी बयान सामने आता रहे पर जब केंद्रीय बैंक के गवर्नर के रूप में फैसले लेने का समय होता…

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प्रतिस्पर्धा और बीएसएनएल

एक तरफ जहाँ रिलायंस समूह अपने एक लाख पचास हज़ार करोड़ के भारी भरकम निवेश के बाद उपभोक्ताओं को देश में मोबाइल पर कॉल करने के लिए निशुल्क सुविधा देने की बात कर रहा था तो वहीं भारत संचार निगम लिमिटेड बाजार की आवश्यकताओं को न समझते हुए अपने दो श्रेणी के पोस्टपेड ग्राहकों के लिए कॉल दरें मंहगी करने में लगा हुआ था. अभी तक बीएसएनएल के ३२५ और ५२५ पोस्टपेड प्लान सिर्फ इसलिए ही लोकप्रिय थे क्योंकि वे उपभोक्ताओं को सही मूल्य पर उचित सेवा देते थे पर…

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एलपीजी सब्सिडी

देश में लंबे समय से राजनीति का मुद्दा बनी रहने वाली पेट्रोलियम पदार्थों की सब्सिडी से देश को वास्तव में कितना नुकसान या फायदा हुआ है इस बात के आंकड़े देने में मंत्रालय के स्तर से जिस तरह से हीला हवाली की जा रही है वह कहीं न कहीं से इस पूरी व्यवस्था में कुछ अनियमितता होने के संदेह उत्पन्न करती है. संपन्न लोगों से अपनी सब्सिडी गरीबों के हित में छोड़ने की खुद पीएम की अपील का कितना असर हुआ है यह भी बयानों में उलझ हुआ आधा सच…

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