नोट बंदी जनता और जन-प्रतिनिधि

८ नवम्बर की रात हुई घोषणा के बाद जिस तरह से देश में आम लोगों की समस्याओं में दिन प्रतिदिन बढ़ोत्तरी ही होती जा रही है उससे यही लगता है कि यह मामला अभी बहुत लंबा खिंच सकता है क्योंकि बैंकों के पास जिस संख्या में नए नोट होने चाहिए थे वह उसके कहीं से भी बराबर तो क्या चौथाई हिस्से तक भी नहीं पहुंच पा रहे हैं जिसका मुख्य कारण नए नोटों की छपाई होना भी है क्योंकि पूरी क्षमता से छापने के बाद भी इस स्थिति से निपटने…

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पराली और प्रदूषण

हमारे देश में महत्वपूर्ण मुद्दों की तरफ ध्यान न देना अपने आप में एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है क्योंकि इस वर्ष मानसून के अन्तिम चरण में पहुँच जाने और उत्तर भारत के खेतों में धान की कटाई के बाद उसकी पराली को सही तरह से उपयोग करने के लिए जो भी कोशिशें पिछले वर्ष की गयी थीं उनके कोई सकारात्मक परिणाम सामने आते नहीं दिखाई दे रहे हैं. आज एक बार फिर से उत्तर भारत की हवाओं में इस पराली के खेतों में जलाये जाने के चलते प्रदूषण…

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सेना के असुरक्षित कैंप

पठानकोट के बाद उरी में हुए आतंकी फिदायीन हमले जिस तरह से सेना के सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित कैम्प्स की सुरक्षा से जुड़े हुए गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं वहीं इस बात पर भी विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है कि क्या हमारे सैनिक इस तरह के हालात में रह रहे हैं जहाँ पर उनके लिए अपनी सुरक्षा कर पाना भी मुश्किल हो रहा है ? यह सही है कि स्थायी छावनी और विभिन्न तरह के अस्थायी कैम्प्स में सुविधाओं में बड़ा अंतर हुआ करता है फिर…

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