कैशलेस “भीम” और आम लोग

विमुद्रीकरण के बाद हर तरह के व्यापार और लेनदेन में नकद को लेकर आने वाली समस्या से निपटने के लिये जिस तरह से सरकार ने कदम उठाने शुरू किये वे अपने आप में देश के कैशलेश होने के इच्छुक उस बड़े हिस्से के लिए सही दिशा में कहे जा सकते हैं पर ये कदम जिस तरह से उलटी तरह से उठाये जा रहे हैं संभवतः उससे ही इनकी कार्यक्षमता पर कुप्रभाव पड़ रहा है. देश में नेट बैंकिंग और कार्ड्स के माध्यम से कैशलेश होने का क्रम बहुत पहले ही…

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प्रीमियम ट्रेन और समस्या

सीमित रूप से आर्थिक रूप से सक्षम यात्रियों को राजधानी जैसी सुविधाओं से युक्त ट्रेन के संचालन के साथ बेहतर सेवाएं देने के उद्देश्य के साथ २०१३ में शुरू की गयी भारतीय रेलवे की प्रीमियम ट्रेन सेवा शुरुवाती परीक्षणों में बहुत सफल रही थी जिसके बाद केंद्र में सरकार बदलने के बाद उन नीतियों पर संभवतः पुनर्विचार किया गया कि रेलवे की आमदनी को बढ़ाने में इन प्रीमियम ट्रेनों का उपयोग किस तरह से किया जा सकता है. इस मामले में संभवतः रेल मंत्री के सामने केवल लाभ के आंकड़े…

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नोट बंदी जनता और जन-प्रतिनिधि

८ नवम्बर की रात हुई घोषणा के बाद जिस तरह से देश में आम लोगों की समस्याओं में दिन प्रतिदिन बढ़ोत्तरी ही होती जा रही है उससे यही लगता है कि यह मामला अभी बहुत लंबा खिंच सकता है क्योंकि बैंकों के पास जिस संख्या में नए नोट होने चाहिए थे वह उसके कहीं से भी बराबर तो क्या चौथाई हिस्से तक भी नहीं पहुंच पा रहे हैं जिसका मुख्य कारण नए नोटों की छपाई होना भी है क्योंकि पूरी क्षमता से छापने के बाद भी इस स्थिति से निपटने…

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