सड़क, संसद और संविधान

आज़ादी के बाद संविधान सभा ने जिस लगन के साथ तात्कालिक परिस्थितियों में विश्व के बड़े लोकतंत्रों के संविधान के पहलुओं पर विचार करने के बाद  जिस तरह से भारतीय संविधान में महत्वपूर्ण बातों और नियमों का समावेश किया था आज समय और नेताओं के साथ राजनैतिक दलों की सोच में बड़े बदलाव के चलते आज उनमें से कुछ नियम सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलने में बाधक बनने लगे हैं पर दुर्भाग्य से आज भी सभी राजनैतिक दल इस समस्या पर विचार करने के स्थान पर केवल…

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सबसे पहले देश

आज पूरे देश में विमुद्रीकरण के चलते जो स्थिति दिखाई दे रही है उसे सही तरह से सँभालने के लिए जो भी कदम उठाये जाने चाहिए उनके लिए सरकार कोशिश तो कर रही है पर जिस तरह से इस कदम की गंभीरता को समझे बिना ही आगे बढ़ने का काम किया गया है वह अब सरकार, रिज़र्व बैंक और जनता के लिए काम करने वाले बैंकों के लिए एक बहुत बड़ी समस्या लेकर आ गया है. देश को यह स्पष्ट चाहिए कि अब यह विमुद्रीकरण किसी भी परिस्थिति में बदला…

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विफल होते शासन और कानूनी बोझ

सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायायधीश न्यायमूर्ति टी एस ठाकुर ने एक बार फिर सरकार से इस बात का आग्रह किया है कि उसकी तरफ से ऐसे तंत्र को बनाये जाने की कोशिश की जानी चाहिए जिससे पहले से ही न्यायाधीशों की कमी से जूझ रहे न्यायालयों पर अनावश्यक काम के बोझ को कम किया जा सके. उनका यह कहना कि कई बार सरकार के तंत्र के निर्णय लेने में विफल होने पर ही अदालतों पर अनावश्यक बोझ बढ़ता है जिसे अपने स्तर से प्रक्रियागत सुधार करके सरकार इस स्थिति में…

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