नेता, अधिकारी और शासन

देश के हर राज्य से कभी न कभी इस तरह की ख़बरें सामने आती ही रहती हैं कि किसी अधिकारी ने किसी राजनैतिक दबाव की परवाह न करते हुए केवल कानून की परवाह की और किसी भी स्तर के नेता से जुड़े मसले पर केवल कानून सम्मत कोशिशें ही की हों. ईमानदारी अधिकारियों के दंडात्मक तबादलों में देश के हर राज्य और हर राजनैतिक दल का रिकॉर्ड लगभग एक जैसा ही है इसलिए यह बहस करना ही बेमानी है कि इस समस्या से आखिर किस तरह से निपटा जा सकता…

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राष्ट्रपति चुनाव की राजनीति

अपने संख्या बल के आधार पर अपने प्रत्याशी को रायसीना हिल्स तक पहुँचाने की मज़बूत स्थिति में राजग के सामने विपक्ष की तरफ से कोई बड़ी चुनौती नहीं है क्योंकि इस चुनाव में अधिकांशतः सत्ता पक्ष अपने व्यक्ति को महत्वपूर्ण पद पर लाना चाहता है जिसे किसी भी तरह से गलत भी नहीं कहा जा सकता है क्योंकि देश के संवैधानिक मुखिया के पद पर बैठने वाले व्यक्ति और प्रधानमंत्री के बीच किसी भी तरह की अनबन या विवाद की ख़बरें सामने आती हैं तो वे दलीय लोकतंत्र और संसदीय…

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चुनाव सुधार में नैतिकता

देश में होने वाले चुनावों में नेताओं की भाषा और नैतिकता का स्तर जिस तरह से निरंतर रसातल की तरफ जा रहा है उसको देखते हुए अब चुनाव सुधारों में ही इस बात की आवश्यकता भी समझी जानी चाहिए कि नेताओं को दंड के भय से अनुचित बातें कहने और आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने से रोकने के बारे में भी उचित और कठोर संशोधन किये जाएँ. एक समय था जब बड़े नेताओं से लगाकर छोटे स्तर तक की राजनीति में सक्रिय लोग किसी भी परिस्थिति में नैतिकता की…

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