तीन तलाक़

मुसलमानों में तीन तलाक़ की स्थिति को लेकर जिस तरह से हर पक्ष अपनी अपनी बातों को लेकर स्पष्टीकरण देने में लगा हुआ है उससे यही लगता है कि यह पूरा मामला इस्लाम में मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों से सम्बंधित होते हुए भी कानूनी उलझनों और बिना बात के बयानों में उलझता जा रहा है. किसी भी देश में नागरिकों को मिले मौलिक अधिकार संविधान द्वारा प्रदत्त हैं और भारतीय संविधान लिंग, धर्म, जाति, भाषा और नस्ल के आधार पर किसी भी भेदभाव के खिलाफ अपनी मंशा दिखाता है पर…

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खादी अब विचार नहीं बाज़ार

अंग्रेजों से स्वाभिमान और अधिकारों की लड़ाई लड़ते हुए अंग्रेजों की भाषा में जिस “अधनंगे फ़क़ीर” ने देश को खादी पहनने के लिए पिछली सदी में सबसे अधिक प्रेरित किया था वह मोहन दास करमचंद गाँधी भी आज की चापलूसी भरी राजनीति में अपने को नितांत अकेला ही महसूस करते क्योंकि जिस तरह से उनके सपने को आज बाज़ार से जोड़कर पूरी बेशर्मी के साथ केवल आंकड़ों पर ही बात की जा रही है उसे देखते हुए किसी भी परिस्थिति में उन्हें बापू के विचारों का समर्थक तो कहीं से…

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उभरते राजनैतिक ध्रुव

पिछले कुछ दिनों से जिस तरह से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी ने सीधे पीएम मोदी के खिलाफ विभिन्न मुद्दों पर मोर्चे खोल रखे हैं उसके चलते उनकी बातों को भी हर तरह के राष्ट्रीय मीडिया में भरपूर स्थान मिलना शुरू हो चुका है. आज जब देश में संघ और खुद सत्ताधारी भाजपा भी पीएम मोदी के साथ खड़े होने वाला दूसरा नेता खोजने में लगी हुई है तो उस परिस्थिति में गैर भाजपाई दलों से आगे बढ़कर राहुल का मोदी विरोध की कमान को संभालना कांग्रेस का एक सोचा समझा…

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