सेना और राजनैतिक समझ

देश की आज़ादी के बाद से ही जिस तरह से महत्वपूर्ण मामलों में सेना की तरफ से सीधे बयान देने के अतिरिक्त किसी अन्य मसले पर कुछ भी बोलने पर के तरह से अघोषित रूप से राजनैतिक समझ बनी हुई थी और उस पर सरकार के साथ विपक्षी दल भी सहमत ही रहा करते थे अब उस स्थिति में व्यापक बदलाव दिखाई दे रहा है जिसके चलते सेना को जहाँ विभिन्न मुद्दों पर बोलने की छूट मिली है वहीं उस पर विपक्षी दलों की तरफ से राजनैतिक हमलों में भी…

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राष्ट्रपति चुनाव की राजनीति

अपने संख्या बल के आधार पर अपने प्रत्याशी को रायसीना हिल्स तक पहुँचाने की मज़बूत स्थिति में राजग के सामने विपक्ष की तरफ से कोई बड़ी चुनौती नहीं है क्योंकि इस चुनाव में अधिकांशतः सत्ता पक्ष अपने व्यक्ति को महत्वपूर्ण पद पर लाना चाहता है जिसे किसी भी तरह से गलत भी नहीं कहा जा सकता है क्योंकि देश के संवैधानिक मुखिया के पद पर बैठने वाले व्यक्ति और प्रधानमंत्री के बीच किसी भी तरह की अनबन या विवाद की ख़बरें सामने आती हैं तो वे दलीय लोकतंत्र और संसदीय…

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राजनैतिक विद्वेष में उलझा गोवंश

रिजिल मक्कुट्टी केरल युवा कांग्रेस के नेता होने के साथ केरल में पार्टी के लिए उभरता हुआ चेहरा थे पर जिस तरह से उन्होंने केंद्र सरकार के मवेशियों की खरीद और बिक्री के लिए लाये गए अधिनियम का विरोध किया वह सभ्य समाज और कानून की नज़रों में बेहद आपत्तिजनक है. देश के कानून ने आज़ादी के बाद से ही हर नागरिक को अपने अनुसार जीवन जीने की छूट दी हुई है पर क्या इस छूट का इस तरह से दुरूपयोग किया जा सकता है? निश्चित तौर पर यहाँ पर…

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