केंद्र और संवैधानिक पद

कर्नाटक में त्रिशंकु विधानसभा के सामने आने के बाद जिस तरह से राजनैतिक घटनाक्रम में तेज़ी से बदलाव दिखाई दिया उससे किसी को भी आश्चर्य नहीं होना चाहिए क्योंकि हमारे नेताओं की नैतिकता केवल तभी तक रहती है जब तक उनको अनैतिक कार्य करने का मौका नहीं मिलता है और इस काम में केंद्र में सत्ताधारी दल की तरफ से सदैव ही दबाव देकर काम किया जाता रहता है. आज़ादी के बाद से जिस तरह से धीरे धीरे केंद्र सरकार ने अपने अधिकारों का नैतिकता के मापदंडों को किनारे करते…

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कश्मीर – पत्थरबाज़ी और अर्थव्यवस्था

कश्मीर घाटी में आतंकी अलगाववादियों के समूहों की तरफ से जिस तरह माहौल को लगातार बिगाड़ने का काम किया जा रहा है उसे देखते हुए वहां पर शांति अभी दूर की कौड़ी ही लगती है पर जिस तरह से राज्य सरकार में शामिल भाजपा के लिए परिस्थितियां मुश्किल होती जा रही है उससे राज्य के साथ देश की राजनीति पर भी पड़ने वाले असर को नकारा नहीं जा सकता है. अपनी चिरकालीन कश्मीर नीति से पीछे हटते हुए जिस तरह से मोदी और भाजपा ने राज्य सरकार में साझेदारी की…

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सामाजिक समस्या का कानूनी हल ?

निर्भया की मौत के बाद देश के कानून में बलात्कारियों को कड़ी सजा देने के लिए बनाये गए पाक्सो कानून के बाद भी महिलाओं/ बच्चियों के साथ होने वाले यौन अपराधों की स्थिति में कुछ बदलाव दिखाई नहीं दिए जबकि उस समय भी सरकार द्वारा यही कहा गया था कि कड़े कानून होने से लोग इस अपराध को करने के बारे में सोचेंगें भी नहीं पर रसाना और उन्नाव की बड़ी चर्चित घटनाओं के बाद जिस तरह से सत्ताधारी दल के लोगों की संलिप्तता के चलते पीड़ितों को न्याय मिलने…

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