सामाजिक समस्या का कानूनी हल ?

निर्भया की मौत के बाद देश के कानून में बलात्कारियों को कड़ी सजा देने के लिए बनाये गए पाक्सो कानून के बाद भी महिलाओं/ बच्चियों के साथ होने वाले यौन अपराधों की स्थिति में कुछ बदलाव दिखाई नहीं दिए जबकि उस समय भी सरकार द्वारा यही कहा गया था कि कड़े कानून होने से लोग इस अपराध को करने के बारे में सोचेंगें भी नहीं पर रसाना और उन्नाव की बड़ी चर्चित घटनाओं के बाद जिस तरह से सत्ताधारी दल के लोगों की संलिप्तता के चलते पीड़ितों को न्याय मिलने…

Read More

महिला सम्मान पर भाजपा का असमंजस

कठुआ, उन्नाव और असम में हुए बलात्कार और उसके बाद होने वाली राजनैतिक नौटंकी में अपनी आंतरिक कलह के कारण आज सत्ताधारी भाजपा जिस भ्रम में दिखाई दे रही है यदि उससे बाहर निकलने का रास्ता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा नहीं खोजा गया तो २०१९ की उसकी संभावनाओं पर दुष्प्रभाव पड़ने की सम्भावनों से इंकार नहीं किया जा सकता है. कठुआ और उन्नाव में जिस तरह से भाजपा के नेता और पार्टी आरोपियों के साथ खड़े दिखाई दिए उससे सीधे तौर पर भाजपा के उस दावे का खोखलापन सामने…

Read More

महिला सम्मान और सुरक्षा

देश में ऊंची राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक पहुँच रखने वाले लोगों के बच्चों द्वारा सदैव ही सार्वजनिक रूप से कुछ न कुछ ऐसा ही किया जाता रहा है जिससे समाज के व्यवहार और पहुँच के चलते उसकी बदलती प्राथमिकताओं को आसानी से समझा जा सकता है. चंडीगढ़ की घटना को राजनैतिक चश्मे और राजनैतिक लाभ हानि से दूर करके यदि निष्पक्षता के साथ देखा जाये तो समाज के उस स्वरुप को ही उकेरती है जो हमारे देश के प्राचीन सूत्र “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता” की खुले आम…

Read More