चुनाव, चंदा और राजनीति

देश के राजनैतिक दलों को जिस तरह से अपने संसाधनों के रूप आम लोगों से चंदा लेने के लिए जो छूट दी गई थी वह टीएन शेषन के ज़माने से ही चुनाव आयोग के निशाने पर रही है फिर भी उस पर नये सिरे से कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया जा सका है जिससे आज नोटबंदी के समय में सभी राजनैतिक दल इस बात के लिए आम लोगों के लिए और भी अधिक संदेहास्पद बन गए हैं कि नियम केवल आम लोगों के लिए हैं और राजनेताओं को उससे हर…

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काले धन के स्वरुप

देश के अंदर प्रवाहित होने वाले काले धन पर प्रभावी रोक लगाने के लिए अब सरकार को इनकम टैक्स के साथ अन्य टैक्स सुधारों पर भी आज की मंहगाई की दरों के अनुरूप काम करना ही होगा वर्ना समय के साथ एक बार फिर से १९४८, १९६० और १९६८ में नोट बंद करने की गयी कवायद की तरह २०१६ के नोट बंद होने के बाद पाकिस्तान से आये नकली नोट और टैक्स चोरी वाली काले धन की समानांतर अर्थव्यवस्था के खड़े होने में देर नहीं लगेगी। देश में काफी सुधारात्मक…

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रिज़र्व बैंक- राजनीति और विकास का मॉडल

                                                                      नीतिगत मुद्दों पर मोदी सरकार के साथ शुरू से ही मतभेद रखने वाले रिज़र्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने एकबार फिर से सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “मेक इन इंडिया” पर सीधे सवालिया निशान लगा दिया है. देश के नीति निर्धारक बैंक के प्रमुख होने के नाते राजन के पास उनके अनुभव के साथ वैश्विक मामलों में जानकारी तो है पर सरकार से इतनी असहमति अपने आप में एक बड़ी बात है क्योंकि आमतौर पर अभी तक सरकार के साथ रिज़र्व बैंक के अध्यक्ष के सुर मिले हुए ही…

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