चुनाव सुधार की तरफ

केंद्र सरकार की तरफ से चुनाव सुधारों पर कुछ पहल करते हुए जिस तरह से लोकसभा और राज्यों के विधान सभा चुनावों के एक साथ कराने की बात कही जा रही है उससे निश्चित तौर पर देश के धन को बचाने में मदद मिलेगी पर क्या भारत जैसे जीवंत लोकतंत्र में इस तरह की किसी गतिविधि से केंद्र में शासन कर रहा दल निरंकुश नहीं हो सकता है ? आज की परिस्थिति में चूंकि कहीं न कहीं किसी राज्य में प्रतिवर्ष चुनाव होते रहते है तो उनके कारण कुछ कदम…

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सबसे पहले देश

आज पूरे देश में विमुद्रीकरण के चलते जो स्थिति दिखाई दे रही है उसे सही तरह से सँभालने के लिए जो भी कदम उठाये जाने चाहिए उनके लिए सरकार कोशिश तो कर रही है पर जिस तरह से इस कदम की गंभीरता को समझे बिना ही आगे बढ़ने का काम किया गया है वह अब सरकार, रिज़र्व बैंक और जनता के लिए काम करने वाले बैंकों के लिए एक बहुत बड़ी समस्या लेकर आ गया है. देश को यह स्पष्ट चाहिए कि अब यह विमुद्रीकरण किसी भी परिस्थिति में बदला…

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विमुद्रीकरण की समस्याएं

देश में बड़े नोटों के विमुद्रीकरण को एक महीना बीत जाने के बाद भी जिस तरह से आम लोगों की समस्यायों का अंत होता नहीं दिखाई दे रहा है उससे यही लगता है कि इतने बड़े फैसले पर सरकार और रिज़र्व बैंक के आंकलन में कहीं न कहीं बहुत बड़ी चूक भी हुई है जिससे पूरे देश में बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ा है. यह भी सही है कि आम लोग आज भी सरकार के इस फैसले को पूरी आशा के साथ पूरा होते हुए देखने के आकांक्षी भी हैं पर…

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