सेना और राजनैतिक समझ

देश की आज़ादी के बाद से ही जिस तरह से महत्वपूर्ण मामलों में सेना की तरफ से सीधे बयान देने के अतिरिक्त किसी अन्य मसले पर कुछ भी बोलने पर के तरह से अघोषित रूप से राजनैतिक समझ बनी हुई थी और उस पर सरकार के साथ विपक्षी दल भी सहमत ही रहा करते थे अब उस स्थिति में व्यापक बदलाव दिखाई दे रहा है जिसके चलते सेना को जहाँ विभिन्न मुद्दों पर बोलने की छूट मिली है वहीं उस पर विपक्षी दलों की तरफ से राजनैतिक हमलों में भी…

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आधार – सुरक्षा और चिंताएं

२००९ में यूपीए-२ सरकार ने देश के नागरिकों की सही पहचान जानने के लिए जिस तरह से आधार के नाम से बायो मेट्रिक पहचान की वैकल्पिक व्यवस्था की परिकल्पना की थी आज समय बीतने के साथ सरकारी योजनाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार से मुक्ति पाने के लिए यह सबसे बड़े हथियार के रूप में सामने आ चुका है. प्रारम्भ में इसका उद्देश्य नागरिकों की पहचान की ऐसी केंद्रीयकृत व्यवस्था बनाना था जिसके माध्यम से देश के किसी भी कोने में गए हुए नागरिक की पहचान सरकारी अभिलेखों से सही और प्रामाणिक…

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समग्र कृषि नीति की आवश्यकता

म० प्र० और महाराष्ट्र में किसानों की तरफ से शुरू किया गया असहयोग आंदोलन मंदसौर में हिंसक होकर ५ परिवारों के लिए अँधेरे लेकर ही आया और अब इस पर सीधे आरोप प्रत्यारोपों के साथ, मीडिया और सोशल मीडिया पर सरकार समर्थक और विरोधी एक दूसरे को गलत साबित करने में लगे हुए हैं. जहाँ तक मंदसौर की बात है तो यह इलाका हर प्रकार से संपन्न और शांत ही माना जाता है और यहाँ से कभी भी किसी भी प्रकार के हिंसक आंदोलनों की लगातार होने वाली घटनाएं भी…

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