चुनाव, चंदा और राजनीति

देश के राजनैतिक दलों को जिस तरह से अपने संसाधनों के रूप आम लोगों से चंदा लेने के लिए जो छूट दी गई थी वह टीएन शेषन के ज़माने से ही चुनाव आयोग के निशाने पर रही है फिर भी उस पर नये सिरे से कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया जा सका है जिससे आज […]

>आयकर में राहत…

>२०१०-११ के बजट में आम आदमी या इस तरह से कहा जाए कि वेतनभोगियों के लिए आयकर ने एक बड़ी राहत दी है तो ठीक ही होगा. अभी तक देश में विभिन्न करों की दरें पूरी तरह से तर्क संगत नहीं बनायीं जा सकी हैं जिसके चलते लोग पूरी ईमानदारी से टैक्स नहीं देना चाहते […]

>भ्रष्टाचार….. सरकार को चुनौती ?

>उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद जिले में जिस तरह से आंबेडकर ग्राम की सड़कों के निर्माण में धांधली खुलकर सामने आई है उसके बाद यह तो तय हो ही गया है की अब भ्रष्टाचारियों में माया सरकार का कोई डर नहीं रह गया है. सभी को याद होगा कि अपने पिछले अल्पमत के कार्यकालों में माया […]