चुनाव सुधार – लोकतंत्र के अनुकूल

देश में चुनावी परिदृश्य को किस तरह से सुधारते हुए लोकतंत्र को बचाये रखा जाये आज यह बहुत ही महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र होने के बाद भी आज हमारे देश के बहुत सारे क्षेत्रों में लोकतंत्र की आधारभूत परिकल्पना को जिस तरह से किनारे किया जा रहा है उससे कहीं न कहीं लोकतंत्र ही कमज़ोर हो रहा है और पूरे देश का लोकतान्त्रिक ढांचा केवल कुछ लोगों के हाथों में ही सिमट हुआ नज़र आता है. आज देश में संविधान की कसमें खाने वाले…

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चुनाव सुधार – इन्टरनेट और मतदान

चुनाव सुधारों के साथ ही बेहतर मतदान प्रतिशत में जिस तरह से हमारे देश ने पिछले ढाई दशकों में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है उसे किसी भी स्तर पर कम नहीं कहा जा सकता है फिर भी इतनी बड़ी आबादी में हर बूथ पर लगभग १५०० अधिकतम मतदाताओं से सीमित समय में मतदान करवा पाना आयोग के साथ मतदान कर्मियों के लिए भी एक बड़ी चुनौती के रूप में बचा हुआ है. देश की घनी आबादी वाले राज्यों में आज भी कुछ मतदान केंद्रों पर इतने अधिक मतदाता हैं कि…

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चुनाव सुधार की तरफ

केंद्र सरकार की तरफ से चुनाव सुधारों पर कुछ पहल करते हुए जिस तरह से लोकसभा और राज्यों के विधान सभा चुनावों के एक साथ कराने की बात कही जा रही है उससे निश्चित तौर पर देश के धन को बचाने में मदद मिलेगी पर क्या भारत जैसे जीवंत लोकतंत्र में इस तरह की किसी गतिविधि से केंद्र में शासन कर रहा दल निरंकुश नहीं हो सकता है ? आज की परिस्थिति में चूंकि कहीं न कहीं किसी राज्य में प्रतिवर्ष चुनाव होते रहते है तो उनके कारण कुछ कदम…

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