गेंहूँ निर्यात और नीतियां

                              आर्थिक मामलों की केन्द्रीय मंत्रिमंडल की समिति ने एक बार फिर से ३०० डॉलर प्रति टन की दर से २० लाख टन गेंहूँ का निर्यात करने को मंज़ूरी दे दी है जिस बारे में सरकार का कहना है कि इससे उसके पास वर्तमान में भंडारण की समस्या से मुक्ति मिलेगी वहीं भंडारण के प्रबंधन को और भी अच्छे तरीके से संचालित किया जा सकेगा. यह सुखद सच ही है कि एक समय अनाज का आयात करने वाला भारत आज अपने अतिरिक्त अनाज को इस तरह से अन्य देशों को…

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किसान क्रेडिट कार्ड- विकास किसका ?

                                 बैंकों द्वारा किसानों को सस्ता कृषि लोन देने के लिए शुरू किए किसान क्रेडिट कार्ड ने निश्चित तौर पर देश में किसानों की समय समय पर पड़ने वाली आर्थिक ज़रूरतों को पूरा करने में बड़ी सफलता पाई है पर अभी हाल ही में एक रिपोर्ट ऐसी भी आई जिसने विवादों के नए पिटारे को खोल दिया और साथ ही देश में उपलब्ध कराये जानी वाली विभिन्न योजनाओं के दुरूपयोग को भी बड़े पैमाने पर सामने लाने का काम किया है. एक विशेष नीति की तहत किसानों को स्थानीय साहूकारों…

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खेती और मनरेगा

                    लोकसभा में कृषि राज्य मंत्री तारिक़ अनवर ने एक सर्वेक्षण का ज़िक्र करते हुए अपने उत्तर में बताया कि मनरेगा के चलते कृषि क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों की संख्या में कमी आई है जिससे मंहगी होती मजदूरी के कारण कृषि की उत्पादन लागत बढ़ गयी है. यहाँ पर इस सवाल और सर्वेक्षण के निहितार्थ भी तलाशे जाने की ज़रुरत है क्योंकि मनरेगा एक ऐसी योजना है जिसके माध्यम से पूरे देश के ग्रामीण स्वरुप को बदलने में देश के राजनैतिक और प्रशासनिक तंत्र को बहुत आसानी हो…

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