आधार – सुरक्षा और चिंताएं

२००९ में यूपीए-२ सरकार ने देश के नागरिकों की सही पहचान जानने के लिए जिस तरह से आधार के नाम से बायो मेट्रिक पहचान की वैकल्पिक व्यवस्था की परिकल्पना की थी आज समय बीतने के साथ सरकारी योजनाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार से मुक्ति पाने के लिए यह सबसे बड़े हथियार के रूप में सामने आ चुका है. प्रारम्भ में इसका उद्देश्य नागरिकों की पहचान की ऐसी केंद्रीयकृत व्यवस्था बनाना था जिसके माध्यम से देश के किसी भी कोने में गए हुए नागरिक की पहचान सरकारी अभिलेखों से सही और प्रामाणिक…

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राजनैतिक विद्वेष में उलझा गोवंश

रिजिल मक्कुट्टी केरल युवा कांग्रेस के नेता होने के साथ केरल में पार्टी के लिए उभरता हुआ चेहरा थे पर जिस तरह से उन्होंने केंद्र सरकार के मवेशियों की खरीद और बिक्री के लिए लाये गए अधिनियम का विरोध किया वह सभ्य समाज और कानून की नज़रों में बेहद आपत्तिजनक है. देश के कानून ने आज़ादी के बाद से ही हर नागरिक को अपने अनुसार जीवन जीने की छूट दी हुई है पर क्या इस छूट का इस तरह से दुरूपयोग किया जा सकता है? निश्चित तौर पर यहाँ पर…

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यूपी- बिजली सुधार चुनौतियाँ और संभावनाएं

  उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग और आपूर्ति में बढ़ते फासले के बीच जिस तरह के कदम लगातार उठाये जाने चाहिए थे उनमें पिछले २५ वर्षों में निरंतर उपेक्षा किये जाने के कारण पिछले दशक में संभवतः प्रदेश की अधिकांश जनता को केवल ८ घंटे बिजली से काम चलना पड़ा था. यह प्रदेश की सरकारों और जनता के लिए बहुत ही चुनौती भरा काम था और स्थिति इतनी बिगड़ गयी थी कि राज्यपाल शास्त्री को यहाँ तक कहना पड़ा था कि यह सब पूर्व की सरकारों के पापों का…

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