>साथ तुम्हाराअच्छा है…………

>जीवन की सांसे तुमसे हैं,जीने की राहें तुमसे हैं.हाथ तुम्हारा साथ हमारे,साथ तुम्हारा अच्छा है …. दुर्बल होती श्रम शक्ति में, मीरा की पवन भक्ति  में .सब कुछ खींचता पास हमारे, साथ तुम्हारा अच्छा है… मन की गांठें खुल जाने में,नयी ग्रंथि फिर पड़ जाने में. जीवन मुक्त अभी होने में,साथ तुम्हारा अच्छा है… गर्मी में पीपल सी छाया ,शीतल जल जब फिर से पाया. मन को ठंडक मिल जाने तक, साथ तुम्हारा अच्छा है …. कोई  मिलता है जब फिर से,दिल डरता है मेरा  फिर से.फिर से मुसका कर…

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>तुम्हीं हो….

>मत पूछो मेरे दिल से, मेरे दिल की चाह को।पहली से आख़िरी सभी चाहत में तुम्हीं हो ॥हो चाहें जितनी दुनिया, हों चाहे राहें कितनी ?शुरुआत से अभी भी मेरी ज़न्नत में तुम्हीं हो। हर एक की दुआ है कि, मिल जाये साथ तेरा ।उठते हुए हर हाथ की मन्नत में तुम्हीं हो ॥ कुछ लोग जी गए थे, किसी और राह में ।इस जिंदगी की राह और राहत में तुम्हीं हो॥ मेरी हर धड़कन भारत के लिए है…

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>मन की चाहत…

> जब जब याद तुम्हारी आईमन के पंछी मुक्त हुए,फिर से एक तमन्ना झांकीदिल के सूने कोटर से. देख तुम्हारी फिर तस्वीरेंदिल में आहट होती है,कोयल जैसे निकल रही हैफिर बसंत के आने में. तेरी चिट्ठी हाथ में आईपंख लगे अरमानों को,भीगे सूखे फिर से अक्षरमन का सावन बरसा जब. जीने के तो लाख बहानेफिर भी मन को ना भाएं,सात जनम फिर से लगते हैंसाथी सच्चा पाने में. मेरी हर धड़कन भारत के लिए है…

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