>तुम्हीं हो….

>मत पूछो मेरे दिल से, मेरे दिल की चाह को।पहली से आख़िरी सभी चाहत में तुम्हीं हो ॥हो चाहें जितनी दुनिया, हों चाहे राहें कितनी ?शुरुआत से अभी भी मेरी ज़न्नत में तुम्हीं हो। हर एक की दुआ है कि, मिल जाये साथ तेरा ।उठते हुए हर हाथ की मन्नत में तुम्हीं हो ॥ कुछ लोग जी गए थे, किसी और राह में ।इस जिंदगी की राह और राहत में तुम्हीं हो॥ मेरी हर धड़कन भारत के लिए है…

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>मन की चाहत…

> जब जब याद तुम्हारी आईमन के पंछी मुक्त हुए,फिर से एक तमन्ना झांकीदिल के सूने कोटर से. देख तुम्हारी फिर तस्वीरेंदिल में आहट होती है,कोयल जैसे निकल रही हैफिर बसंत के आने में. तेरी चिट्ठी हाथ में आईपंख लगे अरमानों को,भीगे सूखे फिर से अक्षरमन का सावन बरसा जब. जीने के तो लाख बहानेफिर भी मन को ना भाएं,सात जनम फिर से लगते हैंसाथी सच्चा पाने में. मेरी हर धड़कन भारत के लिए है…

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>मेरे अरमां

> मेरे अरमां मचल रहे हैं, तेरे अब मचलेंगें कब ? थोड़ी मेहर जो रब की हो तो, पूरे होंगे अबकी सब…. थोड़ी झिझक बची है मुझमें, थोड़ी तुझमें है बाकी. तू जो हाथ थाम ले मेरा, चाँद के पार चलेंगें हम…. घने कुहासे की चादर में, दिल ने फिर अंगडाई ली है. याद वही फिर से आता है, तेरी आहट मिलती जब …. तेरी भोली मुस्कानों में, दिल के अरमां पलते हैं. डूब के तेरी आँखों में अब, जीवन फिर से लेंगें हम…. पल पल जीना मुश्किल है जब,…

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