एहसास

एहसास हुआ जैसे वो अपना सा कोई है, दूर जाते हुए जब उसने पलट कर देखा !! कोई सबमें भी है फिर भी है तनहा इतना, चाँद के राज़ को जब पास से जाकर देखा !! झील सी गहरी हैं  फिर भी हैं कितनी भोली, उनकी आँखों में जब आँखें मिलाकर देखा !! चुप रहती हैं और चुपके से बोलती कितना, आँखों से करते हुए उनको जो इशारे देखा !! मेरी हर धड़कन भारत के लिए है…

Read More

>सावन में पानी ?

>क्यों नहीं आख़िरक्यों नहीं ?सावन में क्यों नहीं बरसता ?पानी !!!! जीवन में सूखे ठूंठों पर, मुरझाई हुई आशाओं पर. पथराती हुई आँखों से,झूठी मुस्कुराहटों तक…  कहीं कुछ तो ज़रूर है,  तभी तो नहीं बरसता सावन में पानी ? अपनों के रिश्तों से, परायों के बंधन तक. सूखती हुई दोस्ती परहरियाती हुई दुश्मनी में कहीं कुछ तो ज़रूर है….तभी तो नहीं बरसतासावन में पानी ? जीवन की गहराई से, मरने की सच्चाई तक.सूखते हुए कंठ से औरभूख से बिलबिलाने तक    कहीं कुछ तो ज़रूर है…..तभी तो नहीं बरसता सावन…

Read More

>घर जब आती मेरी बिटिया !!

>ख़्वाब अधूरे पूरे होते, मन में गीत नए फिर आते !दिल में क़सक कहीं फिर उठती, घर जब आती मेरी बिटिया  !! नन्हें क़दमों से फिर चलकर, छोटी झाड़ू हाथ में लेकर !दो चोटी कर पायल पहने, घर जब आती मेरी बिटिया  !! दुखती माँ की पीठ हमेशा, छोटे हाथों खूब दबाकर ! गुड़ियों को फिर आज सुलाकर, घर जब आती मेरी बिटिया !! बढ़ती उम्र फैलते सपने, हर इच्छा का गला घोंटकर !सकुचाती और खूब सिमटती, घर जब आती मेरी बिटिया  !! पीहर से अब पति के घर तक,…

Read More