राजनैतिक लोग और संवैधानिक पद

                                                          राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की किताब द ड्रमैटिक डेकेड में १९८० की एक घटना के ज़िक्र पर जिस तरह से इस बात का समर्थन किया कि देश के संवैधानिक पदों पर केवल लम्बे राजनैतिक अनुभव वाले लोगों को ही बैठाया जाना चाहिए अपने आप में एक महत्वपूर्ण बात है. हालाँकि अभी तक राष्ट्रपति के पद […]

सुधार की रेल

                                                       पिछले तीन दशकों में देश में मज़बूत सरकारें न बन पाने और सहयोगी दलों द्वारा महत्वपूर्ण रेल मंत्रालय को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़े जाने के कारण ही देश में रेल के विकास की जो भी संभावनाएं बन सकती थीं वे रास्ते में दम तोड़ गयीं. इन महत्वपूर्ण वर्षों में जिस तरह से रेल बिहार […]

छोटे राज्य और विकास

                                                                         बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड बनने के बाद यहाँ के निवासियों की वे आशाएं पूरी तरह से टूट चुकी हैं जिन्हें उन्होंने अलग राज्य के संघर्ष करते समय अपने सपने के रूप में पाला था और आज वहां पहाड़ों की स्थिति कुछ इस तरह की हो चुकी है कि पलायन के चलते […]