चुनाव, चंदा और राजनीति

देश के राजनैतिक दलों को जिस तरह से अपने संसाधनों के रूप आम लोगों से चंदा लेने के लिए जो छूट दी गई थी वह टीएन शेषन के ज़माने से ही चुनाव आयोग के निशाने पर रही है फिर भी उस पर नये सिरे से कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया जा सका है जिससे आज नोटबंदी के समय में सभी राजनैतिक दल इस बात के लिए आम लोगों के लिए और भी अधिक संदेहास्पद बन गए हैं कि नियम केवल आम लोगों के लिए हैं और राजनेताओं को उससे हर…

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विमुद्रीकरण की समस्याएं

देश में बड़े नोटों के विमुद्रीकरण को एक महीना बीत जाने के बाद भी जिस तरह से आम लोगों की समस्यायों का अंत होता नहीं दिखाई दे रहा है उससे यही लगता है कि इतने बड़े फैसले पर सरकार और रिज़र्व बैंक के आंकलन में कहीं न कहीं बहुत बड़ी चूक भी हुई है जिससे पूरे देश में बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ा है. यह भी सही है कि आम लोग आज भी सरकार के इस फैसले को पूरी आशा के साथ पूरा होते हुए देखने के आकांक्षी भी हैं पर…

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प्रीमियम ट्रेन और समस्या

सीमित रूप से आर्थिक रूप से सक्षम यात्रियों को राजधानी जैसी सुविधाओं से युक्त ट्रेन के संचालन के साथ बेहतर सेवाएं देने के उद्देश्य के साथ २०१३ में शुरू की गयी भारतीय रेलवे की प्रीमियम ट्रेन सेवा शुरुवाती परीक्षणों में बहुत सफल रही थी जिसके बाद केंद्र में सरकार बदलने के बाद उन नीतियों पर संभवतः पुनर्विचार किया गया कि रेलवे की आमदनी को बढ़ाने में इन प्रीमियम ट्रेनों का उपयोग किस तरह से किया जा सकता है. इस मामले में संभवतः रेल मंत्री के सामने केवल लाभ के आंकड़े…

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