कैशलेस “भीम” और आम लोग

विमुद्रीकरण के बाद हर तरह के व्यापार और लेनदेन में नकद को लेकर आने वाली समस्या से निपटने के लिये जिस तरह से सरकार ने कदम उठाने शुरू किये वे अपने आप में देश के कैशलेश होने के इच्छुक उस बड़े हिस्से के लिए सही दिशा में कहे जा सकते हैं पर ये कदम जिस तरह से उलटी तरह से उठाये जा रहे हैं संभवतः उससे ही इनकी कार्यक्षमता पर कुप्रभाव पड़ रहा है. देश में नेट बैंकिंग और कार्ड्स के माध्यम से कैशलेश होने का क्रम बहुत पहले ही…

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चुनाव, चंदा और राजनीति

देश के राजनैतिक दलों को जिस तरह से अपने संसाधनों के रूप आम लोगों से चंदा लेने के लिए जो छूट दी गई थी वह टीएन शेषन के ज़माने से ही चुनाव आयोग के निशाने पर रही है फिर भी उस पर नये सिरे से कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया जा सका है जिससे आज नोटबंदी के समय में सभी राजनैतिक दल इस बात के लिए आम लोगों के लिए और भी अधिक संदेहास्पद बन गए हैं कि नियम केवल आम लोगों के लिए हैं और राजनेताओं को उससे हर…

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विमुद्रीकरण की समस्याएं

देश में बड़े नोटों के विमुद्रीकरण को एक महीना बीत जाने के बाद भी जिस तरह से आम लोगों की समस्यायों का अंत होता नहीं दिखाई दे रहा है उससे यही लगता है कि इतने बड़े फैसले पर सरकार और रिज़र्व बैंक के आंकलन में कहीं न कहीं बहुत बड़ी चूक भी हुई है जिससे पूरे देश में बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ा है. यह भी सही है कि आम लोग आज भी सरकार के इस फैसले को पूरी आशा के साथ पूरा होते हुए देखने के आकांक्षी भी हैं पर…

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