२ जी घोटाला वास्तविक या काल्पनिक ?

लम्बे समय के बाद जिस तरह से २०१० की कैग रिपोर्ट में सामने आये २ जी घोटाले को लेकर सभी आरोपियों को विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में छोड़ दिया है वह देश की राजनीति, जाँच एजेंसियों अभियोजन और न्यायालय की सीमाओं पर गभीर सवाल पैदा करता है क्योंकि जिस घोटाले को देश का सबसे बड़ा प्रतीकात्मक घोटाला माना गया या जनता के सामने उसे इस तरह से प्रस्तुत किया गया जैसा उसके माध्यम से मनमोहन सिंह की सरकार ने देश को बड़े राजस्व की चोट दी है आज…

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डेरों, प्रचारकों की दुर्गति के कारण

आज के भौतिक युग में जिस तरह से हर व्यक्ति अपने ही कामों में व्यस्त रहने के लिए अभ्यस्त हो चुका है तो उसके लिये शारीरिक और मानसिक तनाव पैदा करने वाले कारकों में लगातार वृद्धि होती जा रही है जिससे अपने को बचाने का उसे कोई सुरक्षित मार्ग संसार में दिखाई नहीं देता है. यह एक ऐसी परिस्थिति होती है जब व्यक्ति के पास सांसारिक रूप से बहुत कुछ तो होता है पर उसके पास मन की शांति नहीं होती है जिसे खोजने के लिए वह अपनी निष्ठा और…

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बिहार, नितीश और राजनीति

तेजस्वी यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले खुलने के बाद जिस तरह से बिहार के सीएम नितीश कुमार ने बहुत आगे जाकर राज्य में तीन पार्टियों के महगठबंधन को तोड़ते हुए एनडीए में शामिल होने का फैसला किया वह निश्चित रूप से बहुत लोगों को अखर रहा है पर इसमें ऐसा कुछ भी नहीं है कि जिसको नैतिकता, विचारधारा या अन्य भारी भरकम शब्दों के माध्यम से तौला जाये क्योंकि आज देश में राजनीति जिस स्तर पर पहुंची हुई है वहां विचारधारा, अंतरात्मा की आवाज़ आदि ऐसे शब्द बन चुके…

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