सामाजिक समस्या का कानूनी हल ?

निर्भया की मौत के बाद देश के कानून में बलात्कारियों को कड़ी सजा देने के लिए बनाये गए पाक्सो कानून के बाद भी महिलाओं/ बच्चियों के साथ होने वाले यौन अपराधों की स्थिति में कुछ बदलाव दिखाई नहीं दिए जबकि उस समय भी सरकार द्वारा यही कहा गया था कि कड़े कानून होने से लोग इस अपराध को करने के बारे में सोचेंगें भी नहीं पर रसाना और उन्नाव की बड़ी चर्चित घटनाओं के बाद जिस तरह से सत्ताधारी दल के लोगों की संलिप्तता के चलते पीड़ितों को न्याय मिलने…

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२ जी घोटाला वास्तविक या काल्पनिक ?

लम्बे समय के बाद जिस तरह से २०१० की कैग रिपोर्ट में सामने आये २ जी घोटाले को लेकर सभी आरोपियों को विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में छोड़ दिया है वह देश की राजनीति, जाँच एजेंसियों अभियोजन और न्यायालय की सीमाओं पर गभीर सवाल पैदा करता है क्योंकि जिस घोटाले को देश का सबसे बड़ा प्रतीकात्मक घोटाला माना गया या जनता के सामने उसे इस तरह से प्रस्तुत किया गया जैसा उसके माध्यम से मनमोहन सिंह की सरकार ने देश को बड़े राजस्व की चोट दी है आज…

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डेरों, प्रचारकों की दुर्गति के कारण

आज के भौतिक युग में जिस तरह से हर व्यक्ति अपने ही कामों में व्यस्त रहने के लिए अभ्यस्त हो चुका है तो उसके लिये शारीरिक और मानसिक तनाव पैदा करने वाले कारकों में लगातार वृद्धि होती जा रही है जिससे अपने को बचाने का उसे कोई सुरक्षित मार्ग संसार में दिखाई नहीं देता है. यह एक ऐसी परिस्थिति होती है जब व्यक्ति के पास सांसारिक रूप से बहुत कुछ तो होता है पर उसके पास मन की शांति नहीं होती है जिसे खोजने के लिए वह अपनी निष्ठा और…

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