गैर भाजपाई गठबंधन

संसद में सबसे अधिक सदस्यों को भेजने वाले यूपी में विपक्षी तालमेल के चलते भाजपा को जिस तरह से लगातार भाजपा विरोधी वोटों के लामबंद होने से उपचुनावों में हार का मुंह देखना पड़ रहा है उससे आश्चर्यचकित होने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि भाजपा की मोदी सरकार भी पता नहीं क्यों अटल सरकार की तरह पुनः आत्ममुग्धता का शिकार होती जा रही है ? भाजपा के सामने २००४ का उदाहरण बहुत पुराना नहीं हुआ है फिर भी उसकी तरफ से जिस तरह से एक प्रचारवादी अभियान चलाया जाने लगा…

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केंद्र और संवैधानिक पद

कर्नाटक में त्रिशंकु विधानसभा के सामने आने के बाद जिस तरह से राजनैतिक घटनाक्रम में तेज़ी से बदलाव दिखाई दिया उससे किसी को भी आश्चर्य नहीं होना चाहिए क्योंकि हमारे नेताओं की नैतिकता केवल तभी तक रहती है जब तक उनको अनैतिक कार्य करने का मौका नहीं मिलता है और इस काम में केंद्र में सत्ताधारी दल की तरफ से सदैव ही दबाव देकर काम किया जाता रहता है. आज़ादी के बाद से जिस तरह से धीरे धीरे केंद्र सरकार ने अपने अधिकारों का नैतिकता के मापदंडों को किनारे करते…

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वैचारिक अभिव्यक्ति और विभेद

अभी तक के स्थापित मानकों के अनुसार जिस तरह से यह समझा और कहा जाता कि शिक्षा बढ़ने के साथ मनुष्य का सामाजिक, आर्थिक और व्यक्तिगत विकास अच्छी तरह से हो सकता है पर पिछले कुछ दशकों में जिस तरह से अशिक्षितों के साथ शिक्षितों की मानसिक स्थिति भी एक जैसी ही होती जा रही है वह सम्पूर्ण मानव जाति के लिए आने वाले समय में एक खतरा बन सकती है. विश्व के कई देशों में इस्लाम के नाम पर चल रहे चरमपंथ को जिस तरह से उच्च शिक्षित लोगों…

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