नेता, अधिकारी और शासन

देश के हर राज्य से कभी न कभी इस तरह की ख़बरें सामने आती ही रहती हैं कि किसी अधिकारी ने किसी राजनैतिक दबाव की परवाह न करते हुए केवल कानून की परवाह की और किसी भी स्तर के नेता से जुड़े मसले पर केवल कानून सम्मत कोशिशें ही की हों. ईमानदारी अधिकारियों के दंडात्मक तबादलों में देश के हर राज्य और हर राजनैतिक दल का रिकॉर्ड लगभग एक जैसा ही है इसलिए यह बहस करना ही बेमानी है कि इस समस्या से आखिर किस तरह से निपटा जा सकता…

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सोशल मीडिया और समाज

देश में जिस तरह से बढ़ते हुए इंटरनेट के प्रसार से आम लोगों तक सूचनाएं पहुंचनी शुरू हो चुकी हैं वहीं इस तीव्र माध्यम का दुरूपयोग कर समाज में वैमनस्यता फ़ैलाने के लिए भी किया जा रहा है. धार्मिक, सामाजिक, भाषाई और राजनैतिक आधार पर जिस तरह से देश के किसी न किसी हिस्से में बिना सोचे समझे तनाव बढ़ाने वाले लोग सक्रिय हो चुके हैं उनसे निपटने का कोई कारगर तरीका सरकार, पुलिस या प्रशासन के पास नहीं है. ऐसी किसी भी परिस्थिति में सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी आम नागरिकों…

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सेना और राजनैतिक समझ

देश की आज़ादी के बाद से ही जिस तरह से महत्वपूर्ण मामलों में सेना की तरफ से सीधे बयान देने के अतिरिक्त किसी अन्य मसले पर कुछ भी बोलने पर के तरह से अघोषित रूप से राजनैतिक समझ बनी हुई थी और उस पर सरकार के साथ विपक्षी दल भी सहमत ही रहा करते थे अब उस स्थिति में व्यापक बदलाव दिखाई दे रहा है जिसके चलते सेना को जहाँ विभिन्न मुद्दों पर बोलने की छूट मिली है वहीं उस पर विपक्षी दलों की तरफ से राजनैतिक हमलों में भी…

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