नेविगेशन आकाश में भारतीय पहुँच

                                                                 अप्रैल २०१० में भारत द्वारा इस बात की घोषणा के बाद कि शीघ्र ही देश के पास भी अपना नेविगेशन सिस्टम होगा इसरो द्वारा इस दिशा में पूरी तरह से काम करना शुरू कर दिया गया था और कल जिस तरह से इस श्रेणी के तीसरे महत्वपूर्ण उपग्रह को उसकी कक्षा में स्थापित करने में देश को सफलता मिली है उससे यही लगता है कि आने वाले वर्ष में ही देश के पास अपना प्रभावी और देश की आवश्यकताओं को पूरा करने वाले एक बेहतर तंत्र विकसित ही जायेगा.…

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स्वदेशी नौवहन की आवश्यकता

                                       इसरो ने एक बार फिर जिस तरह से भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली (ईआरएनएसएस) के दूसरे उपग्रह को सफलता पूर्वक कक्षा में स्थापित किया उससे भारत के अंतरिक्ष विज्ञान में आगे बढ़ते हुए क़दमों के बारे में अनुमान लगाया जा सकता है. देश की भौगोलिक परिस्थितियों के साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए विशेष रूप से तैयार किये गए इस पूरे तंत्र को स्थापित करने के लिए २०१५ की समय सीमा निर्धारित कि गयी है और जिस तरह से सारा कार्यक्रम अपनी सही गति से चल भी रहा है…

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देसी क्रायोजेनिक और भारत

                                        २० वर्षों की कड़ी मेहनत, तीन असफलताओं और लगन के बाद आखिर भारत के इसरो और उसके वैज्ञानिकों ने पूरी दुनिया को वह करके दिखा दिया है जिसका अभी तक देश के वैज्ञानिक बहुत बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे. सोवियत संघ के विघटन के बाद जिस तरह से रूस ने भारत के साथ अपने पुराने सम्बन्धों को भी अमेरिका के दबाव और अपनी कमज़ोर आर्थिक स्थिति के चलते यह तकनीक देने से मना कर दिया था उसके बाद ही सरकार ने यह तय किया था अब इसरो को…

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