एक राष्ट्र एक चुनाव की परिकल्पना

मोदी सरकार की देश में लोकसभा- विधानसभा चुनाव एक साथ कराये जाने की मंशा पर विभिन्न स्तरों पर विचार करने की दिशा में काम शुरू हो गया है पर क्या इस तरह प्रयास से आने वाले समय में देश को कोई लाभ होगा या फिर देश एक नयी तरह की तानाशाही युक्त लोकतान्त्रिक अराजकता की तरफ बढ़ जायेगा ? आज के समय भी जिस तरह से त्रिशंकु सदन बनने पर सरकार बनाना पूरी तरह से केंद्र सरकार की मंशा पर ही निर्भर हो चुका है उससे आने वाले समय में…

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महिला अपराध और सरकारी संरक्षण

देश में विमर्श का स्तर जितना नीचे गिरता जा रहा है उसे देखते हुए आने वाले समय में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अत्याचारों में भी अगर धर्म जाति को देखकर सरकारें काम करना शुरू कर देंगीं तो संविधान की मूल भावना का साथ किस तरह से न्याय किया जा सकेगा ? ताज़ा प्रकरणों में जिस तरह से कठुआ और उन्नाव में लड़कियों के खिलाफ होने वाले अपराधों में भी पार्टी और धर्म के साथ जातियों को भी प्राथमिकता दी जा रही है उससे निश्चित तौर पर सरकार और सत्ताधारी…

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इंसानी आबादी में वन्य जीव

लखनऊ के आवासीय क्षेत्र में जिस तरह से तीन दिनों तक एक तेंदुएं के चलते आतंक मचा रहा और उससे निपटने के लिए वन विभाग की टीम के पास कोई कारगर योजना नहीं दिखाई दी उससे यही पता चलता है कि किसी हिंसक जीव के शहरी क्षेत्र में आ जाने के बाद उसको जान से मार देने के अतिरिक्त कोई अन्य चारा नहीं है ? तेंदुआ भी संरक्षित प्रजातियों में आता है और उसकी पुलिस की गोली से मरने के बाद वन विभाग अपनी कार्यवाही करने को तत्पर तो दिखाई…

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