बिहार, नितीश और राजनीति

तेजस्वी यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले खुलने के बाद जिस तरह से बिहार के सीएम नितीश कुमार ने बहुत आगे जाकर राज्य में तीन पार्टियों के महगठबंधन को तोड़ते हुए एनडीए में शामिल होने का फैसला किया वह निश्चित रूप से बहुत लोगों को अखर रहा है पर इसमें ऐसा कुछ भी नहीं है कि जिसको नैतिकता, विचारधारा या अन्य भारी भरकम शब्दों के माध्यम से तौला जाये क्योंकि आज देश में राजनीति जिस स्तर पर पहुंची हुई है वहां विचारधारा, अंतरात्मा की आवाज़ आदि ऐसे शब्द बन चुके…

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मेरठ से प्रकाशित जनवाणी में आज २५ जुलाई १७ को मेरा आलेख

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राष्ट्रपति और राजनीति

निर्वाचित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के जीतने पर एक बार फिर से उनके दलित्त होने को मुखर रूप से समाचारों में रेखांकित किया जा रहा है जबकि उनके जीत जाने के बाद इस तरह की बातें किये जाने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए थी. निश्चित तौर पर अपने प्रत्याशी को जिताने लायक संख्या होने पर कोई भी सरकार या पीएम अपनी पसंद के कम समस्या पैदा करने वाले व्यक्ति को ही राष्ट्रपति पद पर देखने के आकांक्षी होते हैं और साथ ही देश के राजनैतिक पटल पर भी अपने समीकरणों को…

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