वैचारिक अभिव्यक्ति और विभेद

अभी तक के स्थापित मानकों के अनुसार जिस तरह से यह समझा और कहा जाता कि शिक्षा बढ़ने के साथ मनुष्य का सामाजिक, आर्थिक और व्यक्तिगत विकास अच्छी तरह से हो सकता है पर पिछले कुछ दशकों में जिस तरह से अशिक्षितों के साथ शिक्षितों की मानसिक स्थिति भी एक जैसी ही होती जा रही है वह सम्पूर्ण मानव जाति के लिए आने वाले समय में एक खतरा बन सकती है. विश्व के कई देशों में इस्लाम के नाम पर चल रहे चरमपंथ को जिस तरह से उच्च शिक्षित लोगों…

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सामाजिक समस्या का कानूनी हल ?

निर्भया की मौत के बाद देश के कानून में बलात्कारियों को कड़ी सजा देने के लिए बनाये गए पाक्सो कानून के बाद भी महिलाओं/ बच्चियों के साथ होने वाले यौन अपराधों की स्थिति में कुछ बदलाव दिखाई नहीं दिए जबकि उस समय भी सरकार द्वारा यही कहा गया था कि कड़े कानून होने से लोग इस अपराध को करने के बारे में सोचेंगें भी नहीं पर रसाना और उन्नाव की बड़ी चर्चित घटनाओं के बाद जिस तरह से सत्ताधारी दल के लोगों की संलिप्तता के चलते पीड़ितों को न्याय मिलने…

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महिला सम्मान पर भाजपा का असमंजस

कठुआ, उन्नाव और असम में हुए बलात्कार और उसके बाद होने वाली राजनैतिक नौटंकी में अपनी आंतरिक कलह के कारण आज सत्ताधारी भाजपा जिस भ्रम में दिखाई दे रही है यदि उससे बाहर निकलने का रास्ता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा नहीं खोजा गया तो २०१९ की उसकी संभावनाओं पर दुष्प्रभाव पड़ने की सम्भावनों से इंकार नहीं किया जा सकता है. कठुआ और उन्नाव में जिस तरह से भाजपा के नेता और पार्टी आरोपियों के साथ खड़े दिखाई दिए उससे सीधे तौर पर भाजपा के उस दावे का खोखलापन सामने…

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