सेना और राजनैतिक समझ

देश की आज़ादी के बाद से ही जिस तरह से महत्वपूर्ण मामलों में सेना की तरफ से सीधे बयान देने के अतिरिक्त किसी अन्य मसले पर कुछ भी बोलने पर के तरह से अघोषित रूप से राजनैतिक समझ बनी हुई थी और उस पर सरकार के साथ विपक्षी दल भी सहमत ही रहा करते थे अब उस स्थिति में व्यापक बदलाव दिखाई दे रहा है जिसके चलते सेना को जहाँ विभिन्न मुद्दों पर बोलने की छूट मिली है वहीं उस पर विपक्षी दलों की तरफ से राजनैतिक हमलों में भी…

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राष्ट्रपति चुनाव की राजनीति

अपने संख्या बल के आधार पर अपने प्रत्याशी को रायसीना हिल्स तक पहुँचाने की मज़बूत स्थिति में राजग के सामने विपक्ष की तरफ से कोई बड़ी चुनौती नहीं है क्योंकि इस चुनाव में अधिकांशतः सत्ता पक्ष अपने व्यक्ति को महत्वपूर्ण पद पर लाना चाहता है जिसे किसी भी तरह से गलत भी नहीं कहा जा सकता है क्योंकि देश के संवैधानिक मुखिया के पद पर बैठने वाले व्यक्ति और प्रधानमंत्री के बीच किसी भी तरह की अनबन या विवाद की ख़बरें सामने आती हैं तो वे दलीय लोकतंत्र और संसदीय…

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योग दिवस – आयोजन और विषमताएं

लखनऊ में विश्व योग दिवस पर आयोजित किये कार्यक्रम में मौसम विभाग का पूर्वानुमान होने के बाद भी जितनी बड़ी संख्या में बच्चों को इसके लिए लाया गया उसे किसी भी तरह से उचित नहीं कहा जा सकता है क्योंकि केवल ज़्यादा लोगों को इकठ्ठा करने और रिकॉर्ड बनाने के लिए इस तरह के कार्यक्रम किये जाने का औचित्य समझ में नहीं आता है. २१ जून का समय देश में ऐसा है कि कुछ हिस्सों में मानसून आ चुका होता है और कुछ स्थानों पर स्थानीय कारणों से मानसून पूर्व…

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