साल कोई फिर ऐसा आये…

उगता सूरज, खिलती धरती, नीला अम्बर फिर मुस्काए !जीवन बने सरल हम सबका,  साल कोई फिर ऐसा आये !! हार जाएँ अब ये आतंकी, अमन चैन जब पंख पसारे !हों राहें खुशहाल हमारी,  साल कोई फिर ऐसा आये !! धरती उगले फिर से सोना, फसल खेत में फिर लहराए !भूखे पेट कोई न सोये,  साल कोई फिर ऐसा आये !! भ्रष्टाचार दूर हो जाए, जन मन फिर कर्मठ बन जाए !नेता सच्चे बने हमारे,  साल कोई फिर ऐसा आये !! अत्याचार ख़त्म हो सारा, कन्या भ्रूण सभी बच जाएँ !पुरुष…

Read More

सुखराम या रामसुख

कल तक गद्दे में थे नोट आज लगी है दिल पे चोटनेता उसको कहते हैं जोबेशर्मी से मांगे वोट।दुःख में नींद नहीं आएगी जेल में सांसे फूल जाएँगीराम राम अब जप कर काटेंसुख को जाना होगा भूल…

Read More

अस्पताल..खुलेगा

एक और अस्पताल बनेगापर गरीब तो बिना इलाज हीबिना चिकित्सकतन्हाई में ही मरेगा।राशन के तेल से तो जलकर मर नहीं सकताक्योंकि वो उसकी पहुँच सेबाहर है।और चुनाव के अलावा उसनेआज तक नेता नामकप्राणी नहीं देखा।चाहे जिस दल की सरकार होउसके सरकार तो गाँव के ही हैंमाई बाप और भगवान् सबवही तो हैं..उसके लिए तो यह ख़बरभी नहीं है कि कोईउसके लिए ही यहबना रहा है॥फिर भी किसी को तो लाभमिलेगाकोई तो कमीशन खा सकेगाअस्पताल के निर्माण मेंचिकित्सकों की नियुक्ति मेंदवाओं की खरीद में और फर्जीपरिवार नियोजन में।चलो फिर भी एक…

Read More