साल कोई फिर ऐसा आये…

उगता सूरज, खिलती धरती, नीला अम्बर फिर मुस्काए !जीवन बने सरल हम सबका,  साल कोई फिर ऐसा आये !! हार जाएँ अब ये आतंकी, अमन चैन जब पंख पसारे !हों राहें खुशहाल हमारी,  साल कोई फिर ऐसा आये !! धरती उगले फिर से सोना, फसल खेत में फिर लहराए !भूखे पेट कोई न सोये,  साल कोई फिर ऐसा आये !! भ्रष्टाचार दूर हो जाए, जन मन फिर कर्मठ बन जाए !नेता सच्चे बने हमारे,  साल कोई फिर ऐसा आये !! अत्याचार ख़त्म हो सारा, कन्या भ्रूण सभी बच जाएँ !पुरुष…

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सावन में पानी ?

क्यों नहीं आख़िरक्यों नहीं ?सावन में क्यों नहीं बरसता ?पानी !!!! जीवन में सूखे ठूंठों पर, मुरझाई हुई आशाओं पर. पथराती हुई आँखों से,झूठी मुस्कुराहटों तक…  कहीं कुछ तो ज़रूर है,  तभी तो नहीं बरसता सावन में पानी ? अपनों के रिश्तों से, परायों के बंधन तक. सूखती हुई दोस्ती परहरियाती हुई दुश्मनी में कहीं कुछ तो ज़रूर है….तभी तो नहीं बरसतासावन में पानी ? जीवन की गहराई से, मरने की सच्चाई तक.सूखते हुए कंठ से औरभूख से बिलबिलाने तक    कहीं कुछ तो ज़रूर है…..तभी तो नहीं बरसता सावन…

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घर जब आती मेरी बिटिया !!

ख़्वाब अधूरे पूरे होते, मन में गीत नए फिर आते !दिल में क़सक कहीं फिर उठती, घर जब आती मेरी बिटिया  !! !! नन्हें क़दमों से फिर चलकर, छोटी झाड़ू हाथ में लेकर !दो चोटी कर पायल पहने, घर जब आती मेरी बिटिया  !!   !! दुखती माँ की पीठ हमेशा, छोटे हाथों खूब दबाकर ! गुड़ियों को फिर आज सुलाकर, घर जब आती मेरी बिटिया  !! बढ़ती उम्र फैलते सपने, हर इच्छा का गला घोंटकर !सकुचाती और खूब सिमटती, घर जब आती मेरी बिटिया  !!!! पीहर से अब पति…

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