नि:शुल्क बेटी वाहिनी

तमाम होहल्ले और सरकारी तामझाम के बाद भी जो काम आम बेटियों के लिए संभव नहीं हो सकता था उसे गांव के रहने वाले एक रिटायर्ड शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ ने अपने पीएफ के १७ लाख रुपयों के बाद २ लाख रूपये खुद से डालकर आसान कर सरकार को भी एक राह दिखा दी है. राजस्थान के रहने वाले डॉ रामेश्वर प्रसाद यादव ने एक बार अपने गांव जाते समय रास्ते में पानी से भीगती लड़कियों को देखकर उन्हें अपनी कार में लिफ्ट दी तब उन्हें लड़कियों से बातचीत करके…

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०४ दिसंबर १७ को जनवाणी में प्रकाशित मेरा आलेख

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डॉक्टर-लैब-फार्मा कम्पनी गठजोड़

एक समय में चिकित्सा व्यवसाय को सबसे अच्छा माना जाता था और यह भी माना जाता था कि कोई भी डॉक्टर किसी भी परिस्थिति में अपने यहाँ आये हुए किसी भी रोगी के हित के लिए ही सदैव प्रयत्नशील रहता है पर आज के बदलते परिवेश में जिस तरह की ख़बरें और घटनाएं सामने आती हैं उनसे आम लोगों की इस धारणा को बहुत धक्का भी लगता है. नयी दवाओं और चिकित्सा जगत में होने वाले नए अनुसंधानों से देश के विभिन्न भागों में काम कर रहे डॉक्टर्स को परिचित…

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