मेरी राय अब मेरी वेबसाइट पर

समाचार पत्रों में १९८६ से ही संपादक के नाम पत्र लिखने की आदत जो बदलती हुई प्राथमिकताओं में भी लगातार बनी ही रही वह ब्लॉग के प्लेटफॉर्म के मिलने के बाद २००८ से लगातार लिखने को प्रेरित भी करती रही। इन बीते आठ सालों में देश दुनिया के सामने आने वाले ताज़ा मुद्दों पर अपनी राय आप सभी तक पहुँचाने का क्रम भी चलता ही रहा है. एक समय ब्लॉग्स को प्रिंट मीडिया में व्यापक स्थान मिलने लगा था तो दैनिक जागरण, नवभारत टाइम्स, अमर उजाला, जनसत्ता, हरिभूमि, भास्कर आदि…

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नवरात्रि

आई नवरात्रि चलो फिर से झुकाएं शीश।मातारानी देखो सदा भक्तों की सहाय हैं।। चंड-मुंड, रक्तबीज राह रोकने खड़े हैं।मातृशक्ति की कृपा से होना बेड़ा पार है।। संस्कार लुप्त हुए सभ्यता पर संकट है।शिवदूती बन फिर सबको जगाओ माँ।। तेरी आराधना की भक्ति लौ जले ही सदा।अंबे करो सब पर कृपा समान रूप माँ।।

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जन्नत और ज़ुल्म

तेरी आँखों का पानी तो सूखेगा ही नहींखून के रंग से कुछ खौफ तुझे है भी नहींतेरा मालिक कभी और अलग होगा नहींतेरी नफरत से भला तेरा कभी होगा नहीं अब भी मौका है ज़रा देख ख़ुशी बच्चों कीकितने मासूम हैं तू खुद भी पिघल जायेगातेरी वो सोच उन्हें कुछ कभी दे सकती हैकभी पूछ के तो देख कभी अपने से ? #पेशावरहमला 

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