राष्ट्रीय राजधानी – बिजली और प्रदूषण

हमारे देश में सरकार चलाने वाले दलों, नेताओं और अधिकारियों को पता नहीं आम लोगों से जुड़े हर सरोकार के बारे में सोचने का मौका कभी मिलता भी है या नहीं क्योंकि पिछले दो दशकों से जिस तरह से जनहित से जुड़े हर मुद्दे पर देश के विभिन्न राज्यों के उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय की तरफ से लगातार स्पष्टीकरण मांग कर आवश्यक निर्देश दिए जाते रहे हैं वे निश्चित तौर पर इस समय में देश चलाने वाली सरकारों और नेताओं के ज़मीनी हकीकत की समझ को ही दर्शाते हैं.…

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छवि बचाने के संकट में मोदी

२०१४ में अपने मज़बूत प्रचार और सटीक नीति के चलते गुजरात के सीम नरेंद्र मोदी ने जिस बड़े परिदृश्य का उपयोग करके देश की जनता के सामने कुछ ऐसा दिखाने में सफलता पायी थी जिसके चलते उन पर विश्वास करके देश ने उन्हें पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के लिए स्पष्ट जनादेश दिया था. गुजरात में गुजराती अस्मिता और विकास की बातें करके जिस तरह से उन्होंने कई क्षेत्रों में बड़े बदलाव करने में सफलता पायी थी संभवतः वही उनकी राजनैतिक शक्ति भी थी पर पूर्ण बहुमत की भारत सरकार…

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एक्सप्रेस वे और सुगमता

देश के हर कोने में यातायात को सुगम बनाने के उद्देश्य से बनने वाले किसी भी एक्सप्रेस वे से निश्चित तौर पर दो बड़े शहरों के बीच की दूरी भले ही सिमट जाती हो पर जिस उद्देश्य को लेकर इनका निर्माण शुरू किया गया था हमारे देश में वह कहाँ तक पहुँच पाया है संभवतः इस पर अभी किसी का भी ध्यान नहीं गया है. राज्य सरकारों राजमार्ग प्राधिकरण और बीओटी के अंतर्गत निजी क्षेत्र द्वारा बनाये जाने वाले विभिन्न एक्सप्रेस वे पर यदि कोई समग्र रिपोर्ट तैयार की जाये…

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