अनुशासन, अपेक्षा और सरकार

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा महाविद्यालयों में ड्रेस कोड लागू किये जाने का व्यापक विरोध होने पर सरकार की तरफ से यह आदेश वापस ले लिया गया है। इसके साथ ही बायोमेट्रिक उपस्थिति लगाने और संपत्ति घोषित किये जाने का भी विरोध हो रहा है। जहाँ तक ड्रेस कोड का प्रश्न है तो सभी शिक्षकों से शालीन और प्रभावशाली कपडे पहनने के लिए कहा जा सकता था उसमें ड्रेस विशेष या रंग विशेष लागू किये जाने का कोई औचित्य नहीं बनता है पर संस्थानों में उपस्थिति सही हो इसके लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति को अनिवार्य किया जाना आवश्यक है. कार्यकुशलता और अनुशासन बढ़ाने के लिए यह सही कदम है और संपत्ति का ब्यौरा दिए जाने में किसी भी तरह की आपत्ति को सुना ही नहीं जाना चाहिए। आने वाले समय में किसी भी सरकारी नौकरी के लिए अभ्यर्थी की संपत्ति को प्रतिवर्ष घोषित करना अनिवार्य किया जाना चाहिए और इसमें विफल रहने पर उनकी अगले शिक्षण सत्र के वेतन को रोकने जैसे प्रबंधों की भी किया जाना चाहिए। साथ ही सरकारी विभागों और उनके प्रमुख सचिवों के साथ ही अन्य विभागीय प्रमुखों को ऐसे किसी भी आदेश को लागू करने से पहले सीधे सीएम की अनुमति और विभागीय मंत्री की संस्तुति भी अनिवार्य की जानी चाहिए क्योंकि कई बार ये अधिकारी चापलूसी करने के चक्कर में अनावश्यक आदेश भी जारी कर देते हैं जो कहीं से भी सरकार की मंशा से मिलते नहीं है पर आम लोगों में यह सन्देश चला जाता है कि सरकार हर मामले में हस्तक्षेप कर रही है।

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