१६ जून और केदारनाथ

                                                 पिछले वर्ष जिस तरह से केदारनाथ में प्रलयंकारी बारिश के चलते बहुत ही वीभत्स दृश्य उत्पन्न हो गया था आज भी उसके बारे में सोच कर लोगों की रूह काँप जाती है. इस महाविनाश के पीछे क्या कारण ज़िम्मेदार थे उन पर विश्व भर के पर्वतीय वैज्ञानिक और सरकारें सोचने में लगी हुई हैं पर जिन लोगों के परिजनों का आज तक पता नहीं चल पाया है उनके मन में यह दिन एक दुःस्वप्न जैसा हो गया है. इस वर्ष यात्रा शुरू होने के साथ जिस तरह से वहां पर मानवीय गतिविधियाँ बढ़ी हुई हैं उस परिस्थति में एक बार फिर से उन कंकालों का मिलना शुरू हो चुका है जो पिछले वर्ष काल कवलित हो गए थे और जिनके बारे में उनके परिजनों को कोई सूचना आज तक नहीं मिल पायी है. इस बारे में केवल उत्तराखंड सरकार के पास करने के लिए बहुत कुछ शेष नहीं है क्योंकि जब तक केंद्रीय स्तर से राज्य को उचित सहायता नहीं मिल पायेगी तब तक सारा कुछ ठीक नहीं किया जा सकता है.
                                        अब मिल रहे कंकालों के बारे में सरकार को सभी परिस्थितियों में उनका डीएनए टेस्ट करवाना चाहिए और जो भी अवशेष मिलें उनको गायब हुए परिजनों के डीएनए से मिलान कर उनको सूचित करने की व्यवस्था भी बनायीं जानी चाहिए. जिन लोगों के परिजन इस त्रासदी में लापता हो गए हैं उन सभी के डीएनए सैंपल एक अभियान के तहत एकत्रित किये जाने चाहिए और वे जिस भी राज्य के रहने वाले हों उनके ये सैंपल वहीं से राज्य सरकारों द्वारा लेकर उत्तराखंड सरकार को भेजने चाहिए जिससे इन लोगों को अनावश्यक रूप से देहरादून तक दौड़ न लगानी पड़े. यदि किसी अवशेष का सैंपल किसी से मिल जाता है तो उनके परिजनों को राज्य सरकार के माध्यम से सूचित किया जाना चाहिए और उनका विधिवत अंतिम संस्कार करने की व्यवस्था भी की जानी चाहिए.
                                        नि:संदेह यह बहुत बड़ा काम है पर यदि इसको पूरा करने में यदि केंद्र राज्यों के समन्वय से ऐसे प्रयास शुरू कर सके तो मिलने वाले कंकालों के परिजनों को सूचित कर उनका अंतिम संस्कार भी किया जा सकता है. मानवीयता तो आज यही कहती है कि देश में केंद और राज्य सरकारें मिलकर इस तरह की किसी योजना को धरातल पर उतारने का काम शुरू करें. यदि एक जुट होकर सभी इस प्रयास में जुट जाएँ तो मिलने वाले कंकालों की पहचान भी की जा सकती है और उनके अंतिम संस्कार को भी किया जा सकता है. इसके साथ ही पूरे देश में इस तरह की हर धार्मिक यात्रा को और भी व्यवस्थित करने के बारे में सोचना शुरू करना भी एक बेहतर विकल्प हो सकता है क्योंकि जब इस घटना से कुछ सीख लेकर हम आगे इनको रोकने में पूरी तरह से सफल हो सकेंगें तो ही इनकी आत्माओं को सच्ची श्रद्धांजलि मानी जाएगी.    
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है…

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