>हिन्दी में भी डोमेन

>सोल में लिए गए एक निर्णय ने भारतीय भाषाओं या कुछ इस तरह से कहें भारतीय उप महाद्वीप की भाषाओं को बहुत ही ऊंचे तक उड़ने के लिए आसमान उपलब्ध करा दिया है। वैसे तो भारत की भाषाओं की इन्टरनेट पर उपस्थिति बनी है पर इस फैसले से अब डोमेन भी भारतीय भाषाओं में मिल सकेंगें। ज़रा सोच कर देखिये कि भारतसरकार.इन या भारतीयपर्यटन.ओआरजी जैसे डोमेन किस हद तक भाषा की गरिमा को नेट पर बढ़ाते दिखाई देंगें। बात भाषा की नहीं है बात पहुँच की है दुनिया जानती है कि जब अन्य भाषाओं को यह सुविधा दी जा चुकी है तो भारत जो आज सबसे बड़ा बाज़ार है उसकी उपेक्षा कैसे की जा सकती है ? बस बाज़ार के इस दबाव ने सही तरह से काम करके ही सही भारतीय भाषाओं को उनका नेट पर उचित स्थान दिलाने का काम तो कर ही दिया है। अब देश में इस बात की समस्या नहीं रहेगी कि जो अंग्रेज़ी नहीं जानते वे नेट पर किस तरह से काम करें ? भाषाओं की मुक्ति से नेट को वैसे भी बहुत बड़ा लाभ मिलने वाला है भारतीय मेधा का डंका सारी दुनिया में बज रहा है और अब इसको और अधिक अवसर मिल सकेंगें अपनी बात को दुनिया तक पहुँचाने के लिए। आशा की जानी चाहिए कि इस अवसर का पूरा लाभ उठाया जाए और अपने उप -महाद्वीप कि सभी भाषाओं को नेट पर उचित स्थान दिलाने का काम किया जाए। नेट पर ख़त्म होते डोमेन के कारण भी इस सभी भाषाओं के द्वार खोलना भी एक मजबूरी थी क्योंकि भारत में नेट अब तेज़ी से पैर पसर रहा है और सूचना क्रांति के इस युग में किसी भी चीज़ को बाँध कर नहीं रखा जा सकता है। अब यह हम भारतीयों पर ही निर्भर करता है कि इस तरह के प्रयास से हम कितना लाभ उठा पाते हैं ? फिलहाल यह एक कदम भारत की विश्व में स्वीकार्यता बढ़ाने में ही काम करने वाला है।

मेरी हर धड़कन भारत के लिए है…

Related posts