हवाई सुरक्षा की अनदेखी

                                                             सूरत में टेक ऑफ के समय जानवर से एक विमान के टकराने के बाद जिस तरह से जबलपुर के डुमना में एक बार फिर से विमान के उतरते समय कल एक जानवर रनवे पर आ गया उससे छोटे शहरों में स्थित देश के हवाई अड्डों की वास्तविक स्थिति का पता चलता है और यह स्थिति और भी चिंताजनक हो जाती है जब इस तरह के अति प्राथमिकता वाले मामलों में भी केवल जांचों के भरोसे ही काम चलाने का प्रयास किया जाता है. जबलपुर में दिल्ली से आ रहे विमान के लैंड करते समय जब वह ज़मीन से केवल १५ फ़ीट ऊपर ही था तो पायलट को रनवे पर कोई जानवर दिखाई दिया तो उसने विमान को आपात परिस्थिति में उतारने के स्थान पर दोबारा टेक ऑफ करवा दिया और एटीसी को इस बारे में सूचना भी दी जिसके बाद एक चक्कर लगाने के साथ ही विमान सुरक्षित रूप से लैंड कर गया. आखिर देश के हवाई अड्डों पर इस तरह किई घटनाएँ आम क्यों होती जा रही हैं अब यह सोचने का विषय है.
                                    यह ऐसी परिस्थिति है जिसके लिए पायलट्स को ट्रेनिंग तो दी ही जाती है पर यदि लैंड करने के बाद रुकते समय इस तरह से कोई समस्या उसके सामने आये तो उसके पास कितने विकल्प शेष बचते हैं ? सुरक्षित लैंडिंग के लिए जितना पायलट की सूझबूझ आवश्यक होती है उससे कहीं अधिक एटीसी और ग्राउंड स्टाफ के साथ हवाई अड्डे का परिचालन करने वाली एजेंसी की प्रभावी उपस्थिति भी बहुत महत्वपूर्ण होती है. यह सही है कि देश में जिस तरह से हवाई यातायात में बढ़ोत्तरी हो रही है उसे देखते हुए सुरक्षा और संरक्षा पर अधिक ध्यान दिए जाने की ज़रुरत महसूस होने लगी है पर आज भी छोटे और मझोले शहरों के हवाई अड्डों को बस अड्डों की तरह चलाने की मानसिकता से अधिकारी और कर्मचारी बाहर नहीं निकल पा रहे हैं. इस तरह की किसी भी सामान्य घटना के बड़ी दुर्घटना में बदलने कोई समय नहीं लगता है इसलिए अब इस समस्या का कारगर विकल्प खोजना ही होगा.
                                  केवल हवाई अड्डे के मुख्य अधिकारी को हटाये जाने से समस्या का हल नहीं निकल सकता है क्योंकि इस तरह की घटनाओं में ग्राउंड स्टाफ की लापरवाही ही होती है फिर भी बड़े अधिकारियों की ज़िम्मेदारी से इंकार नहीं किया जा सकता है. परिचालन से जुड़े हुए सभी लोगों की तात्कालिक ज़िम्मेदारी निर्धारित करते हुए उन पर ही किसी भी अनियमितता पाये जाने के लिए दण्डित किया जाना चाहिए और इसके लिए बड़े अधिकारियों को चेतावनी देनी चाहिए. कोई भी बड़ा अधिकारी रनवे से लगाकर हर प्रशासनिक कार्य एक साथ नहीं कर सकता है इसके लिए अब गलत परिपाटी नहीं शुरू की जानी चाहिए जिसमें निचले स्तर के कर्मचारियों की गलती उच्च अधिकारियों को भुगतनी पड़ जाती है. अब पूरे परिचालन में ज़िम्मेदारी को हर स्तर पर निर्धारित करने के बारे में विचार किये जाने की ज़रुरत भी है क्योंकि इसके बिना हवाई यात्रा को पूरी तरह से मानवीय भूलों से निरापद नहीं किया जा सकता है.    
 मेरी हर धड़कन भारत के लिए है…

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