>हम और टाल मटोल ?

>                         आखिर कार देश के मोबाइल धारकों के लिए वह खास दिन १ नवम्बर को आ ही जायेगा अजब वे बिना नंबर बदले किसी अन्य सेवा प्रदाता से उसी नंबर पर अपनी सेवाए जारी रख सकेंगें. बहु प्रतीक्षित नंबर पोर्टेबिलिटी सेवा का विधिवत शुभारम्भ १ नवम्बर से हरियाणा से होने जा रहा है. कुछ भी हो चाहे जिस कारण से हरियाणा को चुना गया हो पर इससे यह साबित हो जाता है कि पूरे देश में आज विकास की जो रफ़्तार इस प्रदेश ने पकड़ रखी है उसे उद्योग जगत भी मानने लगा है. दिल्ली के साथ होने के कारण  इसको बहुत सारे वे लाभ बिना चाहे भी मिल जाते है जो दूसरे राज्यों को नहीं मिल पाते हैं फिर भी दिल्ली के अन्य पडोसी राज्य उत्तर प्रदेश में अराजकता का माहौल होने के कारण भी विकास की गति वहां पर जोर नहीं पकड़ पाती है.वैसे हरियाणा के लिए यह बात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि १ नवम्बर को ही वह अपना स्थापना दिवस भी मनाता है.    
          देश में आज भी बहुत सारे काम केवल इसलिए नहीं हो पाते हैं जिन्हें बहुत पहले ही हो जाना चाहिए आज भी हम एक ऐसी कार्य संस्कृति विकसित नहीं कर पाए हैं जिसके माध्यम से बहुत कुछ किया जा सके. सरकारी कर्मचारी और कार्यालयों में जिस तरह का माहौल बना रहता है उससे तो यही लगता है कि इन लोगों को देश की तरक्की से कोई मतलब ही नहीं है और ये देश के लिए बड़े बड़े फैसले करने में देरी लगाते रहते हैं. आज भी समय है कि विकास की रफ़्तार को बहुत तेज़ किया जाए पर साथ ही कुछ ऐसा भी किया जाए कि इस विकास की रफ़्तार में कहीं हम अपने लोगों के हकों को ही न कुचल दें ? विकास के नाम पर होने वाले भूमि अधिग्रहण आदि पर नज़र होनी चाहिए क्योंकि कहीं से भी असंतोष की हवा को आग में बदलने में हमारे राजनेता बहुत माहिर हैं.
                    फिलहाल बात फिर से मोबाइल सेवा की क्योंकि इस सेवा के चालू होने के बाद अब सभी सेवा प्रदातों पर इस बात का दबाव बन आ जायेगा कि वे बेहतर सुविधाएँ दें वरना उनके ग्राहक बहुत आसानी से उन्हें छोड़कर दूसरे के पास चले जायेंगें. इस सारे मसले में हो सकता है की सरकारी उपक्रम भारत संचार निगम को बहुत घाटा उठाना पड़े क्योंकि उसकी सेवाओं का जो स्तर होना चाहिए वह आज तक नहीं हो पाया है जिससे लोग दूसरों को आज़माने के चक्कर में इसे छोड़कर भाग भी सकते हैं ? अब समय है कि इस निगम के लोग चेत जाएँ वरना वह दिन दूर नहीं है जब इनके सामने कोई विकल्प शेष नहीं बचेगा और सरकार कब तक घाटे का सौदा चलती रहेगी ? इस तरह से ख़राब सेवाओं के कारण जब इसके पास उपभोक्ता ही नहीं बचेंगें तो सरकार कब तक इसे जिंदा रख पायेगी ? 
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है…

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0 Thoughts to “>हम और टाल मटोल ?”

  1. >बीएसएनएल के अधिकांश अफसर काम करना नहीं चाहते..

  2. >अभी भी एसडीओ के कार्यालय में आने जाने का पता नहीं चलता.