लहरपुर

उपलब्ध इतिहास के अनुसार १३७४ ईस्वी में फ़िरोज़शाह तुग़लक़ ने नगर को पहली बार बसाया था जिसके ३० वर्ष बाद ही स्थानीय पासी राजा लोहरी पासी ने इस स्थान पर आधिपत्य जमाकर इसका नाम लोहारीपुर कर दिया था जो कालांतर में लहरपुर के रूप में प्रचलित हो गया.  अकबर के नवरत्न राजा टोडरमल की जन्मस्थली और हज़रत मज़ाशाह कलंदर की कर्मभूमि रहा लहरपुर अपने आप में बहुत सारी विविधताओं को अपने में समेटे हुए है। लगभग एक लाख की आबादी की नगर पालिका परिषद, तहसील, पुलिस सर्कल और कोतवाली के साथ बुनकरों और ट्रांसपोर्टरों के नगर के रूप में जाना जाता है। प्राकृतिक रूप से उत्तर में केवानी नदी की धारा और चारों तरफ आम के बागों से लहरपुर अपने आप में अलग ही दिखता है. साक्षरता के क्षेत्र में अभी भी लहरपुर में बहुत कुछ किया जाना है क्योंकि यहाँ २०११ की जनगणना के अनुसार साक्षरता ४८.१४% ही है जिसमें पुरुष साक्षरता ५२.१८% तथा महिला साक्षरता ४३.८०% पर ही टिकी हुई है। शिक्षा में अभी भी पिछड़ा होने के कारण बालश्रम यहाँ की मुख्य समस्या है जिससे निपटने के लिए शिक्षा के स्तर को सुधारने की आवश्यकता भी है।