राहुल और चुनौतियाँ

                                           देश के सबसे पुराने और आज के समय में सरकार चला रहे सबसे बड़े दल के उपाध्यक्ष के रूप में जिस तरह से राहुल गांधी ने अब जनता और देश के अन्य संस्थानों के साथ सीधा संवाद बनाने की कोशिशें शुरू की हैं वह उनके राजनैतिक जीवन और देश के लिए बहुत ही आवश्यक हैं क्योंकि अब जिस तरह से कॉंग्रेस के मुख्य कर्ता धर्ता के रूप में रूप में पार्टी ने उन्हें सामने लाना शुरू किया है उससे यही लगता है कि देर से ही सही उन्हें भारतीय राजनीति का ककहरा खुद ही सीखने के लिए छोड़ा जा रहा है क्योंकि अभी तक जिस तरह से देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर पार्टी उनसे कुछ भी बोले जाने की अपेक्षा अपने प्रवक्ताओं के ज़रिये ही अधिकृत राय दिया करती थी तो उसके बाद देश में एक संदेश यह भी जा रहा था कि पार्टी राहुल को परदे के पीछे रखना चाहती है और भारतीय राजनीति में ऐसे तत्व हमेशा से ही सक्रिय रहा करते हैं जिन्हें इस तरह के मुद्दों की तलाश रहा करती है जिसका सीधा असर राहुल की सम्भावनाओं और कॉंग्रेस पर पड़ रहा था.
                                         कॉंग्रेस भविष्य में राहुल को देश की मुख्य राजनीति में लाना ही चाहती है यह किसी से भी छिपा तो नहीं है तो उसे उन्हें देश की राजनीति में अपने अनुसार कुछ प्रयोग करने की छूट भी देनी चाहिए जिससे पूरे मसले पर उनको राजनीति का सही अनुभव हो और उन्हें अपनी बात देश के सामने रखने के लिए किसी भी तरह के सहारे की ज़रुरत भी न पड़े. वैसे पिछले कुछ वर्षों से राहुल ने जिस तरह से पार्टी में गुपचुप तरीके से परिवर्तन करने शुरू किये थे अभी उनका पूरा असर नहीं दिखायी दे रहा है फिर भी आने वाले समय में पार्टी में उसका असर अवश्य ही दिखायी भी देगा. देश के मज़बूत होने के लिए राष्ट्रव्यापी स्तर पर दो तीन पार्टियों का प्रभाव होना भी आवश्यक है क्योंकि उसके बिना एक पार्टी पर दबाव नहीं बन पाता है और कई बार थोड़े से सामजिक और स्थानीय समीकरणों को साध कर पार्टियां लम्बे समय तक राज करने की स्थिति में आ जाती है ? अच्छे शासन के लिए नेताओं को उपकृत करने का क्रम जनता द्वारा चलता ही रहता है पर जब तक नेता देश हित में कुछ मुद्दों को अपनी राजनीति से अलग रखकर काम करना नहीं सीखते तब तक देश का भला कैसे हो सकता है ?
                                        संप्रग-२ सरकार की उपलब्धियों कि किसी भी स्तर पर कम करके भी नहीं देखा जा सकता है क्योंकि सूचना के अधिकार के आने के बाद ही देश के कई बड़े घोटालों का पर्दाफाश हुआ और कई बड़े आरोपी आज जेल के अंदर हैं. ग्रामीण गारंटी योजना के दम पर आज छत्तीसगढ़ ने अपने नागरिकों को कुछ हद तक वे सुविधाएँ देने में सफलता पायी है जो उन्हें आज़ादी के बाद से अभी तक नहीं मिल पायी थी. अब कॉंग्रेस के लोकपाल विधेयक पारित करवा देने के बाद उसका श्रेय लेने की होड़ मची हुई है पर देश के इतिहास में इन बड़े परिवर्तनों के लिए मनमोहन सरकार को भी नरसिंह राव की तरह याद किया जायेगा. राहुल को देश के लिए बहुत कुछ सीखने की ज़रुरत है जब देश में लोकतंत्र है तो कुछ दलों के नेताओं के राहुल पर व्यक्तिगत हमलों का कोई मतलब नहीं बनता है क्योंकि इससे वे क्या देश की जनता को मूर्ख साबित करना चाहते हैं ? जनता के हाथों में सत्ता की चाभी हर बार आती ही है और वह जिसे मौका देती है वह सरकार चलाता है. यह देश के स्थापित लोकतंत्र की एक मर्यादा और परंपरा है तो हर पार्टी के नेताओं को नीतिगत मुद्दों पर ही हमले करने चाहिए और किसी के भी व्यक्तिगत जीवन पर किसी भी तरह के आरोप नहीं लगाने चाहिए. देश को अब नए युवाओं की राजनीति में आवश्यकता है और राहुल या उनके समकक्ष लोग आगे आयें और पक्ष विपक्ष में बैठकर देश के लिए नीतियां बनायें तो देश के लिए अच्छा ही होगा.          
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है…

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