यूपी – सामान्य सुरक्षा और लापरवाही

                                                                  लखनऊ में ३५ वीं नेशनल जूनियर रोइंग चैम्पियनशिप के उद्घाटन पर सीएम अखिलेश यादव द्वारा उड़ाए गए गैस के गुब्बारों में विस्फोट के चलते जिस तरह से नगराम ब्लॉक के बहरौली गांव के १८ लोग झुलस गए उस बारे में विशिष्ट लोगों के साथ आम लोगों की सुरक्षा में हो सकने वाली गंभीर खामियों की तरफ सभी का ध्यान चला गया है. कार्यक्रम में सीएम द्वारा उद्घाटन के समय उड़ाए गए इन गुब्बारों के बारे में विशेषज्ञों का यह मानना है कि इनमें संभवतः हाइड्रोजन के साथ कोई अन्य सस्ता रसायन मिलाया गया है जिसके चलते इस तरह का विस्फोट सामने आया है और लोग इस तरह से झुलस गए हैं. इस दुर्घटना में दोषी चाहे जो भी रहा हो पर इससे रसायनों के मामले में यूपी पुलिस की लापरवाही एक बार फिर से सामने आ गयी है क्योंकि पूरे प्रदेश में गाहे बगाहे इस तरह की दुर्घटनाएं सामने आती ही रहती हैं. अब इन गुब्बारों में गैस भरने वाले लालबाग के विक्रेता इरफ़ान के खिलाफ मुक़दमा दर्ज़ कर लिया गया है.
                                                             इस सम्बन्ध में सबसे चिंताजनक बात यह भी है कि गुब्बारों की सप्लाई करने के बाद क्या उनकी किसी भी तरह की जांच की आवश्यकता पुलिस या सीएम की सुरक्षा में लगी हुई एजेंसियों को महसूस नहीं हुई या फिर इस तरह के मामलों में जांच का कोई प्रावधान ही नहीं है ? यदि किसी भी सुरक्षा नियम का उल्लंघन हुआ है तो उसके लिए दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए क्योंकि यह सीएम की सुरक्षा के साथ ही बड़े कार्यक्रमों में प्रशासनिक लापरवाही का बहुत ही ख़राब उदाहरण है. यदि इस तरह के किसी भी आयोजन के समय ही गुब्बारों को उड़ाने के समय ही विस्फोट हो जाये तो उसकी भयावहता को समझा जा सकता है तथा पूरे समारोह स्थल पर अफरा तफरी का माहौल भी बन सकता है जो किसी भी परिस्थिति में सुरक्षा सम्बन्धी चिंताओं को बढ़ाने वाला ही होगा और उसमें बड़े नुकसान से इंकार भी नहीं किया जा सकता है.
                                                       रसायनों की मात्रा में परिवर्तन कर उसे आसानी से विस्फोट के लायक बनाया जा सकता है इस बारे में कोई दो राय नहीं है पर क्या इसे किसी अन्य माध्यम से सुरक्षित नहीं रखा जा सकता है क्योंकि आजकल कार्यक्रमों के उद्घाटन के समय इस तरह के गुब्बारे उड़ाने का चलन आम होता जा रहा है. विशिष्ट लोगों की सुरक्षा के साथ ही इसके उपयोग के लिए कड़े मानकों के प्रयोग के बारे में भी यदि नियमों में कोई कमी है उसे पूरे देश के लिए ही सुधारने की आवश्यकता है क्योंकि कार्यक्रम को सफल और आकर्षक बनाये जाने की इस कोशिश के पीछे छिपे हुए खतरों के प्रति जिस तरह से यह लापरवाही सामने आई है वह निश्चित तौर पर चिंताजनक है. जिन लोगों को इस दुर्घटना में नुकसान हुआ है सरकार उनके लिए चिकित्सा तो उपलब्ध कर सकती है पर उनके होने वाले शारीरिक और आर्थिक नुकसान की भरपाई कभी भी नहीं कर सकती है. इसलिए अब बड़े आयोजनों में गैस और अन्य रसायनों के प्रयोग वाले स्थानों पर इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कानून और उनके अनुपालन को सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है.

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