बेहतर कर संग्रह

                             इस वर्ष के फरवरी माह तक के आंकड़ों के अनुसार इस बार देश में पहले के मुकाबले अधिक कर संग्रह करने में सरकार को बड़ी सफलता हाथ लगी है इन करों में सेवा शुल्क, उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क समेत सभी करों के संग्रह में भारी बढ़ोत्तरी देखने को मिली है. ऐसा नहीं है कि इससे पहले सरकार का कर संग्रह बहुत ख़राब स्तर पर रहा करता था पर इस बार विभिन्न प्रचार माध्यमों के द्वारा सरकारी नीति की घोषणा के साथ कुछ हद तक धमकी भी काम आई है जिस कारण सभी तरह के कर संग्रह में यह वृद्धि दर्ज की गई है. देश में आज भी कर ढांचे में जिस स्तर पर सुधार की आवश्यकता है वह नहीं हो पा रही है जिससे भी कर को उस अनुपात में एकत्रित करने में बहुत असुविधा होती रहती है. पिछले वित्तीय वर्ष के लिए सरकार ने जहाँ ४.६९ लाख करोड़ रुपयों के कर संग्रह का लक्ष्य रखा था उसमें से फरवरी माह तक ४.१७ लाख करोड़ रुपयों का संग्रह किया जा चुका है और मार्च के आंकड़े आने के बाद यह स्थिति और भी सुधरने की आशा है क्योंकि वैसे भी देश में पूरे वर्ष के लंबित कर आदि का भुगतान करने के लिए मार्च के महीने को ही सीमा के रूप में लिया जाता है.
                       वित्तीय सुधारों और बढ़ती आर्थिक गतिविधियों के बीच जिस तरह से आज कर संग्रह बढ़ रहा है उसे अभी और बढ़ाने के लिए कर ढांचे को और तर्क संगत बनाने के साथ ही कर संग्रह के तरीके को सुधारने की आवश्यकता है क्योंकि आज भी इस कर ढांचे में जितने बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार ने अपने पैर जमा रखे हैं उसमें सरकार को बहुत बड़े स्तर पर कर चोरी कर रहे लोगों पर अंकुश लगाने के लिए किसी भी स्तर पर सफलता नहीं मिल पा रही है. आज भी विभिन्न राज्य और केंद्र स्तरीय करों के संग्रह में जिस स्तर पर सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत से बड़े स्तर पर घपले किये जा रहे है यदि उन पर भी किसी तरह से अंकुश पाया जा सके तो देश में और भी बड़े स्तर पर कर संग्रह करने के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है. अभी तक बहुत सारी ऐसी सेवाएं भी हैं जो वास्तव में कर योग्य हैं पर उनके बारे में सही तरह से आंकलन न किये जाने से ये असंगठित रूप से भ्रष्टाचार की जनक बनी हुई हैं ?
                       सरकार को कर संग्रह के किसी भी प्रयास को और अधिक पारदर्शी बनाने का प्रयास करने की दिशा में सोचना चाहिए क्योंकि देश के आम नागरिक किसी भी तरह की कर चोरी में सम्मिलित नहीं होना चाहते हैं पर बेहद जटिल प्रक्रियाओं के चलते आज भी जो आसानी से कर दे सकते हैं वे भी इससे कन्नी काटते रहते हैं जिस कारण से भी कर संग्रह को उस स्तर पर नहीं पहुँचाया जा सकता है जहाँ इसे आबादी और प्रगति के अनुसार होना चाहिए. पहली बार कर के ढांचे में सम्मिलित होने वालों के लिए कुछ वर्ष छूट के रूप में दिए जाने चाहिए जिससे वे कर देने के बाद मिलने वाली शांति की अनुभूति कर सकें और उन्हें कर ढांचे में आने के बाद एक नियमित विकास की दशा में किसी भी तरह की अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में न उलझाया जा सके क्योंकि आज आम नागरिक सिर्फ इसलिए ही कर देने से डरता है कि कल पता नहीं किस तरह से उसे इन करों के लिए प्रताड़ित किया जाने लगे ? किसी भी तरह के कर संग्रह में लगे हुए कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए नागरिकों के प्रति अच्छा व्यवहार रखना भी सरकार की प्राथमिकता में होना चाहिए क्योंकि जब तक विश्वास बहाली के ये क़दम नहीं उठाये जाएंगें तब तक सरकार को मिलने वाला यह कर भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की जेब में जाने से नहीं रोक जा सकेगा.     
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