फ़र्ज़ी आई डी पर सिम

       देश में किस तरह से फ़र्ज़ी पहचान पत्रों का इस्तेमाल करके अपराध करने के लिए सिम लिए जा रहे हैं इसका ताज़ा उदाहरण दिल्ली में सामने आया है. एक व्यक्ति ने अपनी पड़ोसन को तंग करने के लिए पीएमओ के फ़र्ज़ी पहचान पत्र का उपयोग किया और वह इसका निरंतर दुरूपयोग करता रहा. यहाँ पर सवाल यह है कि अब जब ज़्यादातर मामलों में पुलिस भी मोबाइल सर्वलांस को ही अपने अपने हथियार के रूप में इस्तेमाल करती है तो इस तरह के फ़र्ज़ी सिम कार्डों के बाद वह किसी भी नतीज़े पर किस तरह पहुँच पायेगी ? जब किसी की हिम्मत इतनी बढ़ सकती है कि वह पीएमओ के फ़र्ज़ी कार्ड का दुरूपयोग कर सके और सिम देने वाली कम्पनी भी किस हद तक लापरवाह है कि शिकायत के बाद भी उसने भी इस मामले की तह तक जाना उचित नहीं समझा ? यह सारी फ़र्ज़ी बातें देश को बहुत बड़े सुरक्षा संकट में फंसा सकती हैं और इस बारे में अभी तक कोई भी सोच भी नहीं रहा है.
     नए सिम को बेचने के नियमों की जिस तरह से खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं उससे यही लगता है कि इन कम्पनियों के ख़िलाफ़ अब कोई ठोस नीति बनानी ही होगी जिससे अपराधियों को इस तरह से सिम आसानी से न उपलब्ध हो पायें ? सबसे पहले प्री पे सिम में दी जाने वाली सभी सुविधाओं को रोका जाना चाहिए क्योंकि जब तक पते का सत्यापन नहीं हो जाये तब तक सिम उपयोग में लाये जाने पर पाबन्दी होनी चाहिए हाँ इतना अवश्य किया जा सकता है कि इन सिमों पर आने वाली काल की सुविधा दी जा सकती है जिससे आपातकाल में फंसे हुए लोगों को इन सिमों पर आने वाली काल से कुछ हद तक राहत मिल सके. वैसे देश हित में इस मामले को गंभीरता से लेने की ज़रुरत है क्योंकि कोई भी कम्पनी अभी तक पते का सत्यापन ठीक ढंग से नहीं कर रही है और नए सिम पर मिलने वाली ख़ूबियों के चलते रिटेलर भी इस सिमों को फ़र्ज़ी पहचान पत्र आदि पर खूब बेचकर कम्पनी की तरफ़ से दी जाने वाली योजनाओं का लाभ उठाने में नहीं चूक रहे हैं.
    सबसे पहले पते के सत्यापन के लिए कुछ घंटे निर्धारित कर दिए जाने चाहिए और इनके लिए डी एन डी की तरह कोई ऐसी भी व्यवस्था होनी चाहिए कि अगर किसी एक ही पते से दूसरा सिम लिया जाये तो कम्पनी इसकी सूचना किसी वेबसाइट पर देख सके जिससे किसी आम उपभोक्ता की पहचान को चुराकर कोई अन्य कम्पनी किसी नए व्यक्ति को सिम न बेच ले ? इस मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि किसी भी फ़र्ज़ी सिम कार्ड वाले की सेवाएं बंद नहीं होती हैं जबकि कम्पनियां अपने पुराने उपभोक्ताओं से निरंतर पहचान पूछकर उन्हें परेशान करती रहती हैं. कई ऐसे मामले भी सामने आये हैं कि सही पहचान पत्र दिए जाने के बाद भी लोगों की सेवाएं यह कहकर बंद कर दी जाती हैं कि पहचान सही नहीं है ? एक तरह जहाँ फ़र्ज़ी लोगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है वहीं सही लोगों को निरंतर परेशान किया जा रहा है. इस मामले में अब सही क़दम उठाने का समय है वरना इसके कारण कोई बड़ा संकट कभी भी आ सकता है.      

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0 Thoughts to “फ़र्ज़ी आई डी पर सिम”

  1. नियमों की धज्जियां ही तो उड रही हैं …. आपको दीपावली की शुभकामनाएं !!