>तुम्हीं हो….

>मत पूछो मेरे दिल से, मेरे दिल की चाह को।
पहली से आख़िरी सभी चाहत में तुम्हीं हो ॥

हो चाहें जितनी दुनिया, हों चाहे राहें कितनी ?
शुरुआत से अभी भी मेरी ज़न्नत में तुम्हीं हो।

हर एक की दुआ है कि, मिल जाये साथ तेरा ।
उठते हुए हर हाथ की मन्नत में तुम्हीं हो ॥

कुछ लोग जी गए थे, किसी और राह में ।
इस जिंदगी की राह और राहत में तुम्हीं हो॥



मेरी हर धड़कन भारत के लिए है…

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0 Thoughts to “>तुम्हीं हो….”

  1. >तुम्ही हो तुम्ही हो …हर जगह हर पल तुम ही हो …उस तुम को और इस कविता लिखने वाले हम को बहुत बधाई …!!