>तवांग में दलाई लामा

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आज का दिन चुपचाप एक और इतिहास बनने जा रहा है क्योंकि निर्वासित परन्तु भारत में सम्मानित तिब्बत के धार्मिक गुरु दलाई लामा आज से अरुणाचल प्रदेश के अपने दौरे की शुरुआत कर रहे हैं। जैसा की हम सभी जानते हैं कि उनकी इस यात्रा को लेकर चीन काफी दिनों से हल्ला मचा रहा है। आज भारत के कड़े रुख के कारण ही चीन अब खुल कर तो कुछ नहीं कह रहा पर उसके मन में कसक तो बनी है कि भारत ने उसकी बात नहीं माना। इस मामले पर मनमोहन सिंह पहले ही कह चुके हैं कि दलाई लामा को कहीं आने जाने से नहीं रोका जाएगा। इस बात के बाद उनकी यात्रा सरकारी तौर पर रोके जाने का मामला समाप्त ही हो गया था। चीन को दलाई लामा का तवांग जाना इसलिए खल रहा है क्योंकि जब दलाई लामा पहली बार भारत आए थे तो वे इसी मठ में रुके थे। वहां के स्थानीय निवासियों ने अभी हाल में हुए चुनावों में भारी उत्साह दिखाया था और आज भी वे भारत को अपने अधिक करीब मानते हैं। दलाई लामा के स्वागत में जिस तरह से तवांग को दुल्हन को सजाया जा रहा है और भारत सरकार भी वहां पर उनका जोरदार स्वागत चाहती है इसलिए सभी को पूरी छूट दे रखी है। भारत सरकार वहां पर दलाई लामा के स्वागत को पूरे उत्साह से देखना चाहती है क्योंकि वहां के निवासी किस तरह से सोचते हैं उसका प्रदर्शन इसमें दिख जाएगा। एक बात जो समझ में नहीं आ रही कि सरकार ने विदेशी मीडिया को वहां जाने की अनुमति क्यों नहीं दी ? हो सकता है कि कूट नीतिक स्तर पर ऐसा करने से कुछ लाभ हो पर विश्व मीडिया अपने हिसाब से अगर यह यात्रा दिखाता तो कोई समस्या नहीं आने वाली थी हाँ कुछ खोजी मीडिया वाले सम्भव था कि कुछ दलाई लामा और भारत विरोधी वहां पर भी खोज ही लेते ? फिर भी आशा कि दलाई लामा की अरुणाचल यात्रा वहां के निवासियों के लिए बहुत यादगार होने जा रही है। वैसे भी संतों के चरण बहुत शुभ होते हैं ऐसा हम सभी भारतवासी मानते हैं….

मेरी हर धड़कन भारत के लिए है…

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