कैशलेस “भीम” और आम लोग

विमुद्रीकरण के बाद हर तरह के व्यापार और लेनदेन में नकद को लेकर आने वाली समस्या से निपटने के लिये जिस तरह से सरकार ने कदम उठाने शुरू किये वे अपने आप में देश के कैशलेश होने के इच्छुक उस बड़े हिस्से के लिए सही दिशा में कहे जा सकते हैं पर ये कदम जिस तरह से उलटी तरह से उठाये जा रहे हैं संभवतः उससे ही इनकी कार्यक्षमता पर कुप्रभाव पड़ रहा है. देश में नेट बैंकिंग और कार्ड्स के माध्यम से कैशलेश होने का क्रम बहुत पहले ही शुरू हो चुका था पर आम लोग इसमें किसी तरह की धोखाधड़ी से बचने के लिए इससे कतराते हुए ही अधिक दिखाई देने लगे जिससे देश की कैशलेस अर्थ व्यवस्था में इसके माध्यम से जो लाभ उठाये जा सकते थे वे आज भी दूर की कौड़ी ही नज़र आते हैं. आज भी जिस तरह से बैंकों के एटीएम और अन्य गोपनीय सूचनाओं के लीक होने की बातें सामने आती रहती हैं उससे आम लोगों में यह विश्वास और भी मज़बूत हो जाता है कि उनकी मेहनत की कमाई कहीं इसी तरह से धोखे से न हड़प ली जाये. हालाँकि सरकार और बैंकों की तरफ से ऑनलाइन लेनदेन को सुरक्षित करने के प्रयास लगातार किये जा रहे हैं फिर भी अभी लोगों के मन में इसकी सुरक्षा के प्रति संदेह बना ही हुआ है.
अब इस मामले में सरकार की तैयारियों के बीच दावों और उनके धरातल पर सत्यापन करने के लिए दो दिन पहले खुद पीएम द्वारा जनता को समर्पित यूपीआई एप्लिकेशन भीम की बात करते हैं कि वह किस तरह से काम करने वाला है. पीएम ने जितनी आसानी से खादी ग्रामोद्योग को भुगतान कर दिया उसे देखने से हर व्यक्ति को यही लगा होगा कि वह भी यह काम इतनी ही सरलता से कर सकता है पर मेरी दो दिनों में लगातार की गयी कोशिशों के बाद मोबाइल में डाउनलोड हुआ भीम मुश्किल से काम करना शुरू कर पाया जिसमें बैंकों के बारे में जानकारी जुटाने में उसे तीस से चालीस बार खाते को खोजना पड़ा जिसके बाद एप्लीकेशन में एक यूपीआई आईडी बनाने में सफलता मिल गयी. इसके बाद इस आईडी में जोड़े गए बैंक की तरफ से मोबाइल बैंकिंग सेवा शुरू करने का ओटीपी आया जिसके बारे में यह भी सूचना थी कि यह अगले पांच दिनों में बैंक की तरफ से मुझे मिलने वाली ईमेल में यह ओटीपी डालकर मोबाइल बैंकिंग सेवा शुरू की जा सकती है तब से मैं उस ईमेल की प्रतीक्षा में हूँ जो मुझे अगले चार दिनों में कभी भी मिल सकती है. जिस एप्लिकेशन को आम लोगों के लिए इतना सरल बताया जा रहा है उसके एक्टिवेशन के लिए इतनी उबाऊ प्रक्रिया करने के स्थान पर इसके डेवलपर, रिज़र्व बैंक और एनपीसीआई (भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम) को क्या इसे सीधे आधार से जोड़ने का विकल्प भी नहीं देना चाहिए था जिससे इसके माध्यम से सरलता से भुगतान किया जा सके ? जिन लोगों के पास आज नेट बैंकिंग की सेवा नहीं है वे किस तरह से इस भीम की सेवा से लाभान्वित हो पायेंगें यह समझ से पर है इसलिए सरकार को आम लोगों की वित्तीय सुरक्षा और गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए इसके लिए आधार के विकल्प पर भी ध्यान देना चाहिए.
इतने बड़े काम को शुरु करने से पहले सरकार को क्या निजी वॉलेट कंपनियों की तरह कोई ऐसा एप्लीकेशन बनाना चाहिए जिसमें ५ या दस हज़ार की सीमा के साथ लेनदेन करने के लिए एक्टिवेशन बहुत ही आसान हो जिससे अपनी छोटी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आम लोग भी इसका उपयोग कर पाएं. एप्लिकेशन के साथ इतनी कोशिशें करने के स्थान पर आम लोग सीधे नकद में लेनदेन पर ही अधिक भरोसा रखेंगें क्योंकि कोई भी आम व्यक्ति इतनी मेहनत करने के बाद भी जब इसका उपयोग सही तरह से नहीं कर पायेगा तो उसको कैशलेस की इस अवधारणा से दूर जाने में देर नहीं लगेगी और देश में नकदी पर निर्भरता कम करने की सरकारी कोशिशों का सही फल भी नहीं मिल पायेगा. कोई भी सेवा शुरू करने से पहले उसकी व्यापक टेस्टिंग करना भी आवश्यक है क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र के विभिन्न बैंकों के यूपीआई एप्लिकेशन आज भी अच्छी तरह से काम नहीं कर रहे हैं जिससे लेनदेन के सबसे सुरक्षित इस स्वरुप को आज भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका है. देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई का एसबीआई पे एप्लिकेशन आज भी बहुत देर में खुलता है तथा लॉगिन होने काफी समय लेता है जिससे आम लोग इतनी देर प्रतीक्षा करने की स्थिति में होंगें यह भी सोचने का विषय है.
विमुद्रीकरण के चलते देश में अस्थायी रूप से मुद्रा का जो संकट बना है वह कैशलेस प्रणाली के सही तरह से काम न करने की स्थिति में और भी दबाव में आ सकता है हालाँकि अब बाजार में गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं पर दो हज़ार और पांच सौ के नए नोटों को एक बार फिर जिस तरह से एकत्रित किया जाने लगा है वह सरकार की सभी कोशिशों को पलीता लगाने के लिए काफी है क्योंकि जो राशि बाजार में आ रही है उसमें से अधिकांश को दबाया जा रहा है जिससे भी बाजार में नकदी का यह संकट अनुमान से और भी लंबे समय तक बना रह सकता है. कर सुधारों और करों के राज्यों एवं केन्द्र के बीच बंटवारे के कारगर नियमों के साथ अब आम लोगों को कर देने के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता भी है पर जब तक इस दिशा में गंभीरता से सुधारों को नहीं अपनाया जाता है कर देने वाले लोगों की संख्या नहीं बढ़ने वाली है. देश में कर दाताओं कि स्थिति का अंदाज़ा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि एक आंकड़े के अनुसार देश में १० लाख से ऊपर की २५ लाख से अधिक कारें हैं जबकि केवल २४ लाख लोग ही अपने को १० लाख की श्रेणी से ऊपर बताकर करों का भुगतान करते हैं ? ऐसी स्थिति में सरकार को हड़बड़ी में विमुद्रीकरण जैसे कोई कदम उठाने से पहले उनकी समग्र तैयारियों पर भी ध्यान देना ही होगा जिससे प्रगति पर बढ़ने के साथ आम लोगों के लिए होने वाली समस्याओं को क़म किया जा सके.

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