केन्या में भारतीय इलाकों पर हमले

                                                           केन्या के लामू काउंटी और ताना रिवर इलाके में जिस तरह से सोमालिया से जुड़े अल क़ायदा के संगठन अल शबाब ने अंधाधुंध हमले कर २९ लोगों को मौत के घाट उतार दिया है उससे पूरी दुनिया में फैले हुए भारतीयों पर इस्लामी आतंकियों की नज़र होने का अंदाजा लगाया जा सकता है. हमलावरों का यह मानना है कि इन स्थानों में मुसलमानों की ज़मीनें छीनी जा रही हैं और वे ऐसा नहीं होने देंगें ? जिस तरह से दुनिया के विभिन्न देशों में इस तरह से भारत वंशियों पर निशाना लगाये जाने का क्रम अभी बिलकुल शुरुवाती दौर में ही है आने वाले समय में इसके बढ़ने और पूरी दुनिया में फैलने की पूरी सम्भावना भी है. जिन देशों में इस्लामी चरमपंथियों का प्रभाव है अब वहां पर किसी भी तरह की नयी व्यापारिक गतिविधि को शुरू करने से पहले भारतीयों को कई बार सोचने की आवश्यकता भी है क्योंकि अभी तक इस खतरे से बाहर रहने वाले भारतीय भी संभवतः आतंकियों की लिस्ट में आ चुके हैं ?
                                                      भारतीयों के कुशल उद्यमी होने और दुनिया के किसी भी क्षेत्र में बस सकने की दृढ इच्छाशक्ति के कारण जिस तरह से बहुत सारे देशों में उनकी उपस्थिति बढ़ती ही चली जा रही है उस परिस्थति में आज कई देशों में वे अपनी मेहनत के दम पर मज़बूत आर्थिक शक्ति के रूप में सामने आ रहे हैं. अफ़सोस की बात यह भी है कि इस आर्थिक विकास के बंटवारे में जिस तरह से स्थानीय लोगों को शामिल होना चाहिए उसमें उनकी सहभागिता न होने के स्थान पर वे धार्मिक शिक्षा को अधिक मान्यता दे रहे हैं. आज व्यावसायिक रूप से इन देशों में मुसलमानों के पिछड़ते जाने के पीछे भी यही कारण काम कर रहे हैं पूरी दुनिया में मुस्लिम इसी तरह के संकट में हैं. अल क़ायदा और अन्य इस्लामी चरमपंथी गट यही साबित कर युवाओं को धार्मिक शिक्षा और जिहाद की तरफ मोड़ने का काम करने में लगे हुए हैं जिस कारण भी वे किसी आर्थिक / सामाजिक प्रतिस्पर्धा में नहीं टिक पा रहे हैं.
                                                     आज के समय में इस्लामी चरमपंथी गुटों के बढ़ते प्रभाव के पीछे भी कुछ अमेरिका जैसे प्रभावशाली देशों का बहुत बड़ा हाथ है क्योंकि इन्होने पिछली सदी में और इस सदी में भी खाड़ी के आर्थिक संसाधनों पर अपना कब्ज़ा बनाये रखने के लिए जिस तरह से स्थानीय समीकरणों को ख़राब किया है आज वैश्विक जिहाद कहीं न कहीं से उससे भी जुड़ा हुआ लगता है. अच्छा हो कि इन देशों के मामले में संयुक्त राष्ट्र के स्थान पर इस्लामिक देशों के समूह को आगे बढ़कर काम करने को प्राथमिकता दी जाये जिससे कम से कम इन देशों में सक्रिय आतंकी संगठनों को युवाओं को धर्म के नाम पर बरगलाने के अवसर न मिल पाएं ? पर आज के अमेरिकी प्रभुत्व वाले समय में कोई भी समूह क्या ऐसा करना भी चाहेगा क्योंकि अमेरिका की आर्थिक सम्पन्नता और चकाचौंध भरी ज़िंदगी के कारण इस्लामी देश के नागरिक भी अन्य देशों के नागरिकों की तरह अमेरिका में रहने के सपने से दूर नहीं हो पाते हैं. भारत सरकार को इस मामले में अपने प्रवासी नागरिकों के लिए एक एडवाइजरी जारी करनी चाहिए जिससे सभी सुरक्षित रह सकें.       
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है…

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