एहसास

एहसास हुआ जैसे वो अपना सा कोई है,
दूर जाते हुए जब उसने पलट कर देखा !!

कोई सबमें भी है फिर भी है तनहा इतना,
चाँद के राज़ को जब पास से जाकर देखा !!

झील सी गहरी हैं  फिर भी हैं कितनी भोली,
उनकी आँखों में जब आँखें मिलाकर देखा !!

चुप रहती हैं और चुपके से बोलती कितना,
आँखों से करते हुए उनको जो इशारे देखा !!
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है…

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0 Thoughts to “एहसास”

  1. >आदरणीय डा०आशुतोष जीनमस्कार !कोमल भावों से सजी …………दिल को छू लेने वाली प्रस्तुती

  2. >बहुत प्रेरणा देती हुई सुन्दर रचना …गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाइयाँ !!Happy Republic Day………Jai HIND